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कोर्ट संसद के बनाए कानून पर रोक नहीं लगा सकती, वक्फ कानून पर केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा

Waqf Act row: वक्फ कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं के जवाब में केंद्र सरकार ने अपना हलफनामा दायर किया है। हलफनामे में कहा गया कि यह अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि नए कानून के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों को छीन लिया जाएगा।

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Apr 26, 2025

Waqf Act row: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को वक्फ (संशोधन) कानून, 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर दिया। हलफनामे में वक्फ (संशोधन) कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने का अनुरोध करते हुए कहा कि अदालतें किसी वैधानिक प्रावधान पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोक नहीं लगता सकती, वह सिर्फ वैधता की समीक्षा कर सकती हैं। संसद की तरफ से बनाए गए कानूनों पर संवैधानिकता की धारणा लागू होती है।

सरकार ने दिया 1,332 पृष्ठों के प्रारंभिक जवाबी हलफनामे

इसके साथ ही 1,332 पृष्ठों के प्रारंभिक जवाबी हलफनामे में केंद्र सरकार ने कानून का बचाव करते हुए कहा कि चौंकाने वाली बात है कि 2013 के बाद वक्फ भूमि में 20 लाख हेक्टेयर (ठीक 20,92,072.536 हेक्टेयर) से अधिक की बढ़ोतरी हुई। इसके लिए निजी और सरकारी संपत्तियों पर अतिक्रमण किया गया और वक्फ के पहले के प्रावधानों का दुरुपयोग किया गया।

केंद्र ने कहा कि यह कानून वैध है

सरकार ने कहा कि संसद ने अपने अधिकार क्षेत्र में काम किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वक्फ जैसी संस्थाओं का प्रबंधन इस तरह से हो कि उनमें आस्था रखने वालों और समाज के लोगों का भरोसा बना रहे और धार्मिक स्वायत्तता का उल्लंघन न हो। केंद्र ने कहा कि यह कानून वैध है और विधायी शक्ति के वैध प्रयोग का परिणाम है।

सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल को याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान 7 दिन में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। मामले में सुनवाई 5 मई को होगी।

धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर फैलाई जा रही अफवाहें

हलफनामे में कहा गया कि यह अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि नए कानून के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों को छीन लिया जाएगा। अदालत विधायी क्षमता और संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर कानून की समीक्षा कर सकती है। सरकार ने कहा कि प्रमुख राजनीतिक दलों के सदस्यों वाली संसदीय समिति की तरफ से बहुत व्यापक, गहन और विश्लेषणात्मक अध्ययन के बाद कानून में संशोधन किए गए हैं। इस संशोधन से किसी भी व्यक्ति के वक्फ बनाने के धार्मिक अधिकार में कोई हस्तक्षेप नहीं होता। यह संशोधन केवल प्रबंधन और पारदर्शिता के लिए किया गया है।

Published on:
26 Apr 2025 08:47 am
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