राष्ट्रीय

‘प्यार करना अपराध है?’ मुस्लिम नाबालिग लड़की की शादी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, NCPCR को लगाई फटकार

Supreme court: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल उठाया गया था। हाईकोर्ट ने दंपति और परिवार के सदस्यों को सुरक्षा देने के आदेश दिया था।

2 min read
Aug 19, 2025
सु्प्रीम कोर्ट (Photo-IANS)

सु्प्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की एक विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में 2022 के पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें एक (तत्कालीन) 16 वर्षीय मुस्लिम लड़की और उसके 30 वर्षीय पति को सुरक्षा प्रदान की गई थी। शीर्ष कोर्ट ने एनसीपीसीआर को सवाल किया कि आप इस हाईकोर्ट के फैसले के चुनौती कैसे दे सकते है।

ये भी पढ़ें

राहुल गांधी के वाहन के नीचे आया पुलिसकर्मी, ‘Voter Adhikar Yatra’ के दौरान हुआ हादसा

मुस्लिम नाबालिग लड़की की शादी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि 15 वर्ष से अधिक आयु की लड़की यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण या पोक्सो अधिनियम के प्रावधानों के बावजूद मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम है। हाईकोर्ट ने दंपति जावेद— आशियाना और उनके बच्चे को परिवार के सदस्यों सहित उन लोगों से जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा प्रदान की थी जो उन्हें धमकी दे सकते थे।

सु्प्रीम कोर्ट ने एनसीपीसीआर को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एनसीपीसीआर को फटकार लगाई, जिसने पॉक्सो के उल्लंघन का दावा किया था। एनसीपीसीआर ने परिवार को सुरक्षा देने वाले आदेश को चुनौती देने पर यह कदम उठाया। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि आपको चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है। अगर दो नाबालिग बच्चों (यानी आशियाना और उसके बच्चे) को हाईकोर्ट से सुरक्षा मिली हुई है, तो आप ऐसे आदेश को कैसे चुनौती दे सकते हैं। शीर्ष कोर्ट का कहना है कि हम यह समझ नहीं पा रहे है कि एनसीपीसीआर एक नाबालिग को दी गई सुरक्षा से कैसे असंतुष्ट हो सकता है।

जानिए हाईकोर्ट का फैसला

इससे पहले हाईकोर्ट ने न केवल दंपति को सुरक्षा प्रदान की थी, बल्कि यह भी निर्देश दिया था कि उनका विवाह जिसे एनसीपीसीआर ने बाल विवाह और बाल यौन शोषण के समान घोषित किया था, क्योंकि यह न्यूनतम विवाह योग्य आयु संबंधी मौजूदा कानूनों का उल्लंघन करता था। यह मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार वैध है।

एनसीपीसीआर के वकील ने रखी ये बात

बाल अधिकार संस्था की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भट्टी ने कहा कि अदालत संरक्षण प्रदान करना जारी रख सकती है, लेकिन कानून के मुद्दे को खुला रखा जाना चाहिए, अर्थात क्या 15 साल की लड़की के पास पर्सनल लॉ के आधार पर विवाह करने की कानूनी और मानसिक क्षमता हो सकती है।

'कानून के प्रश्न' पर कोई चर्चा नहीं हो सकती

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट इससे सहमत नहीं था। कोर्ट ने कहा कि बच्चों को जीवन की सुरक्षा प्रदान करने वाले आदेश पर विचार करते समय 'कानून के प्रश्न' पर कोई चर्चा नहीं हो सकती। अदालत ने एनसीपीसीआर से कहा कि अगर आप इस प्रश्न पर बहस करना चाहते हैं, तो उचित मामले में संपर्क करें।

'आप इसे कैसे चुनौती दे रहे हैं'

शीर्ष कोर्ट ने बाल अधिकार संस्था से पूछा, यहां कानून का कोई सवाल ही नहीं उठता। अगर हाईकोर्ट ने (संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत) आदेश जारी करने की अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए आदेश पारित किया है, तो आप इसे कैसे चुनौती दे रहे हैं? लड़की अपने पति के साथ रह रही है! और उसका एक बच्चा भी है। आपको क्या समस्या है?

ये भी पढ़ें

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश…SC के जज और अब उपराष्ट्रपति उम्मीदवार? जानें कौन हैं INDIA ब्लॉक के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी

Updated on:
19 Aug 2025 04:32 pm
Published on:
19 Aug 2025 04:02 pm
Also Read
View All

अगली खबर