
Crude Oil Price: दुनिया में क्रूड की कीमतें फिर से तेज होने और महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते देश की अर्थव्यवस्था के लिए फिलहाल अच्छे संकेत नजर नहीं आ रहे। पश्चिम एशिया संकट से राहत नहीं मिलने, तेल की कीमतें बढ़ने और विदेशी निवेशकों के निकलने जैसे बाहरी कारकों के चलते सोमवार को देश के शेयर बाजार में डेढ़ प्रतिशत तक गिरावट आई। तेल के दाम फिर से 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए। बाजार में गिरावट का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। पिछले एक माह में वैश्विक कारणों से भारत का बाजार करीब छह फीसदी गिर चुका है जिससे उसका पूंजीकरण करीब 25 लाख रुपए कम हो चुका है।
केवल सोमवार को ही मार्केट कैप में आठ लाख करोड़ रुपए की कमी आई। खास बात यह है कि इस गिरावट से सबसे अधिक युवा प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि शेयर बाजार के निवेशकों में 30 साल से कम उम्र के लोगों की संख्या करीब 38 फीसदी है। इन हालात के बीच भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अनंत नागेश्वरन ने संकट को स्वीकार किया है और निकट भविष्य के लिए तीन जोखिम बताते हुए संभल कर और रणनीतिक रूप से चलने का आह्वान किया है।
| तारीख | ब्रेंट क्रूड ऑयल ($/बैरल) | क्रूड में बदलाव | सेंसेक्स | सेंसेक्स में बदलाव |
|---|---|---|---|---|
| 28 अगस्त | 88.10 | — | 77,265 | — |
| 28 सितंबर | 109.02 | +23.8% | 72,772 | -5.81% |
| एक महीने में बदलाव | +20.92 डॉलर | 23.8% महंगा | -4,493 अंक | 5.81% गिरावट |
37.9% 30 साल से कम उम्र के निवेशक शेयर बाजार में, इनकी संख्या 2020 में केवल 23.5 फीसदी थी
44% 30 साल से कम उम्र के निवेशक म्यूचुअल फंड्स में
अमरीकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से अक्टूबर में ब्याज दरों में 0.25% बढ़ोतरी की आशंका है। ग्लोबल रेटिंग एजेंसियों का मानना है कि 7 अक्टूबर को मॉनिटरी पाॅलिसी की समीक्षा के बाद भारतीय रिजर्व बैंक भी रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो कर्ज महंगा हो जाएगा और ईएमआइ बढ़ जाएगी। यानी महंगाई को रोकने के लिए उठाया गया कदम लोगों की जेब पर और भारी पड़ सकता है।
भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अनंत नागेश्वरन ने देश के सामने निकट भविष्य के लिए तीन चुनौतियां बताई हैं और संकेत दिए हैं कि संभल कर रणनीतिक रूप से चलने का समय है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत की भौगोलिक स्थिति, आकार और परिस्थिति को देखते हुए हमारे पास कोई एक विकल्प चुनने का जोखिम नहीं है बल्कि हमें जोखिम कम करने के लिए उपाय करना होगा। इस उपाय में काफी लागत आएगी। सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में निर्णय लेते समय इस बात को ध्यान में रखना चाहिए।
अमरीका के साथ अस्थिर संबंध: भारत में पूंजी प्रवाह व निवेश प्रभावित हो सकता है। टैरिफ, प्रतिबंध कानून व व्यापार प्रतिबंध से गुटों में शामिल होने का लगातार दबाव।
ऊर्जा बाजार का संकट: क्रूड की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ इसकी उपलब्धता, माल ढुलाई और बीमा लागत का भी संकट। तांबा, चांदी और पॉलीसिलिकॉन की बढ़ती लागत से सोलर जैसे नवीकरणीय ऊर्जा लागत बढ़ने की आशंका। तांबेकी ओर बदलाव को और भी महंगा बना देगी। तांबे के सांद्रण पर आयात निर्भरता, रणनीतिक भंडार के लिए पैसे की जरूरत।
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