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Indian Stock Market: क्रूड की मार से बाजार बेहाल, CEA ने गिनाईं भारत के सामने 3 बड़ी आर्थिक चुनौतियां

Inflation Risk : तेल की कीमत, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धड़कन बढ़ा दी है। CEA की चेतावनी के बीच सवाल यह है कि महंगे ऊर्जा आयात से लेकर AI की दौड़ तक भारत अपनी आर्थिक सुरक्षा कैसे मजबूत करेगा?
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Sep 29, 2026
Indian Stock Market
Indian Stock Market: क्रूड ने मचाई बाजार में तबाही! CEA ने गिनाईं भारत के सामने 3 बड़ी आर्थिक चुनौतियां (PC: AI)

Crude Oil Price: दुनिया में क्रूड की कीमतें फिर से तेज होने और महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते देश की अर्थव्यवस्था के लिए फिलहाल अच्छे संकेत नजर नहीं आ रहे। पश्चिम एशिया संकट से राहत नहीं मिलने, तेल की कीमतें बढ़ने और विदेशी निवेशकों के निकलने जैसे बाहरी कारकों के चलते सोमवार को देश के शेयर बाजार में डेढ़ प्रतिशत तक गिरावट आई। तेल के दाम फिर से 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए। बाजार में गिरावट का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। पिछले एक माह में वैश्विक कारणों से भारत का बाजार करीब छह फीसदी गिर चुका है जिससे उसका पूंजीकरण करीब 25 लाख रुपए कम हो चुका है।

केवल सोमवार को ही मार्केट कैप में आठ लाख करोड़ रुपए की कमी आई। खास बात यह है कि इस गिरावट से सबसे अधिक युवा प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि शेयर बाजार के निवेशकों में 30 साल से कम उम्र के लोगों की संख्या करीब 38 फीसदी है। इन हालात के बीच भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अनंत नागेश्वरन ने संकट को स्वीकार किया है और निकट भविष्य के लिए तीन जोखिम बताते हुए संभल कर और रणनीतिक रूप से चलने का आह्वान किया है।

Crude Oil Price: एक माह में ऐसे चढ़ा क्रूड (डॉलर प्रति बैरल)

तारीखब्रेंट क्रूड ऑयल ($/बैरल)क्रूड में बदलावसेंसेक्ससेंसेक्स में बदलाव
28 अगस्त88.10—77,265—
28 सितंबर109.02+23.8%72,772-5.81%
एक महीने में बदलाव+20.92 डॉलर23.8% महंगा-4,493 अंक5.81% गिरावट

कितने युवा निवेशक

37.9% 30 साल से कम उम्र के निवेशक शेयर बाजार में, इनकी संख्या 2020 में केवल 23.5 फीसदी थी
44% 30 साल से कम उम्र के निवेशक म्यूचुअल फंड्स में

इन वजहों से बाजार में गिरावट

  • महंगा क्रूड: पश्चिम एशिया संकट बढ़ने से एक माह में क्रूड 23% महंगा हुआ, महंगाई बढ़ने का खतरा और रुपए पर दबाव
  • बढ़ता बॉन्ड यील्ड: : अमरीका में सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल 20 साल में सबसे अधिक 5.23% पर, ज्यादा रिटर्न के लिए विदेशी निवेशक भारत नहीं आ रहे।
  • ब्याज दरें बढऩे की आशंका: ईरान संकट से दुनियाभर में महंगाई बढ़ रही, अक्टूबर में अमरीका व भारत में बैंक ब्याज दर 0.25% बढ़ने की आशंका
  • विदेशी बिकवाली: विदेशी निवेशकों ने सोमवार को भारतीय बाजार से 3000 करोड़ रुपए निकाले, सितंबर में अब तक करीब 18,000 करोड़ रुपए की निकासी।

ईएमआइ बढ़ने का खतरा

अमरीकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से अक्टूबर में ब्याज दरों में 0.25% बढ़ोतरी की आशंका है। ग्लोबल रेटिंग एजेंसियों का मानना है कि 7 अक्टूबर को मॉनिटरी पाॅलिसी की समीक्षा के बाद भारतीय रिजर्व बैंक भी रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो कर्ज महंगा हो जाएगा और ईएमआइ बढ़ जाएगी। यानी महंगाई को रोकने के लिए उठाया गया कदम लोगों की जेब पर और भारी पड़ सकता है।

नागेश्वरन बोले तीन बड़ी चुनौतियां, संभल कर चलने का समय

भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अनंत नागेश्वरन ने देश के सामने निकट भविष्य के लिए तीन चुनौतियां बताई हैं और संकेत दिए हैं कि संभल कर रणनीतिक रूप से चलने का समय है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत की भौगोलिक स्थिति, आकार और परिस्थिति को देखते हुए हमारे पास कोई एक विकल्प चुनने का जोखिम नहीं है बल्कि हमें जोखिम कम करने के लिए उपाय करना होगा। इस उपाय में काफी लागत आएगी। सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में निर्णय लेते समय इस बात को ध्यान में रखना चाहिए।

अमरीका के साथ अस्थिर संबंध: भारत में पूंजी प्रवाह व निवेश प्रभावित हो सकता है। टैरिफ, प्रतिबंध कानून व व्यापार प्रतिबंध से गुटों में शामिल होने का लगातार दबाव।
ऊर्जा बाजार का संकट: क्रूड की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ इसकी उपलब्धता, माल ढुलाई और बीमा लागत का भी संकट। तांबा, चांदी और पॉलीसिलिकॉन की बढ़ती लागत से सोलर जैसे नवीकरणीय ऊर्जा लागत बढ़ने की आशंका। तांबेकी ओर बदलाव को और भी महंगा बना देगी। तांबे के सांद्रण पर आयात निर्भरता, रणनीतिक भंडार के लिए पैसे की जरूरत।

ये दिए सुझाव

  • एआइ में कमी: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) में भारत की प्रगति फिलहाल धीमी, एक साल बाद हालात बदलेंगे लेकिन हमें एआइ बौद्धिक संपदा (आइपी) व एज एआइ पर ध्यान देना होगा। एआइ के प्रयोग वाली नौकरियों पर ध्यान देने की जरूरत।
  • जरूरी चीजों के भारत में निर्माण पर जोर
  • सेमीकंडक्टर और एआई इकोसिस्टम में जुटी जापान व यूरोप की छोटी कंपनियों के अधिग्रहण, तकनीकी सहयोग या समझौते के प्रयास हों
  • अपरिहार्य उत्पादों की पहचान कर उनका उत्पादन और निर्यात
Updated on:
29 Sept 2026 07:58 am
Published on:
29 Sept 2026 07:29 am