
Congress Working Committee: दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक शुरू हो गई है। बैठक में कांग्रेस हाईकमान सहित कई बड़े नेता पहुंचे हैं। कांग्रेस ने कुछ प्रमुख मांगों पर योजना बनाई है। इसमें मतदाता सूची में होने वाले हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक करने की मांग, जिन वोटरों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें सूचित करना और अपील करने का अवसर देने की मांग, राजनीतिक दलों को मतदाता सूची व अन्य संबंधित आवश्यक डेटा आसान फॉर्मेट में उपलब्ध कराना और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा में पारदर्शिता बरतने की बात कही है।
वर्किंग कमेटी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए। ज्ञानेश कुमार को पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। उन्हें तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
दिल्ली के इंदिरा भवन में हो रही इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, केरल की वायनाड सीट से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश समेत कई राज्यों के प्रभारी भी शामिल हुए हैं।
बैठक से पहले पूर्व लोकसभा अध्यक्ष और कांग्रेस नेता मीरा कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर पार्टी की रणनीति बैठक के दौरान तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को 'जाना होगा'। मीडिया से बातचीत में लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि सीडब्ल्यूसी की बैठक में रणनीति बनाई जाएगी और बाकी चीजों पर 'इंडिया' ब्लॉक के सहयोगियों के साथ बैठकर चर्चा की जाएगी। सीईसी ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा, उन्हें हटाना बहुत जरूरी है।
पश्चिम बंगाल के लिए एआईसीसी प्रभारी प्रकाश जोशी ने भी सीईसी की आलोचना करते हुए कहा कि आज की वर्किंग कमेटी की बैठक के बाद ही अंतिम रणनीति सामने आएगी। यह सच है कि ज्ञानेश कुमार जिस तरह की हरकतें लगातार कर रहे थे, वे देशद्रोह की श्रेणी में आती हैं। उन पर न सिर्फ मुकदमा चलना चाहिए, बल्कि उन्हें जेल में होना चाहिए।
कांग्रेस ने वोटर लिस्ट के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर), नए वोटरों को जोड़ने के लिए 'फॉर्म 6' से जुड़े बदलावों, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने, और वोटर लिस्ट डेटाबेस पर सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल को लेकर चिंता जताई है।
वहीं, विपक्षी इंडिया ब्लॉक की बैठक बुधवार को होने की उम्मीद है, जिसमें इस मुद्दे पर संयुक्त रणनीति पर चर्चा की जाएगी। सीईसी को हटाने की मांग को लेकर संसद में एक और नोटिस दिया जा सकता है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक फैसले लेने की प्रक्रिया पर जताई गई चिंताओं को खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि किसी संस्था के भीतर चर्चा के दौरान अलग-अलग राय और विचार होना सामान्य बात है। चुनाव आयोग का कहना है कि उसके आदेशों को कानूनी मान्यता प्राप्त है और वे तय कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार ही जारी किए जाते हैं।
26 सितंबर को चुनाव आयोग ने कहा था कि देशव्यापी एसआईआर आदेश को तीनों आयुक्तों- सीईसी ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सर्वसम्मति से मंजूरी मिली थी। आयोग ने कहा कि 'फॉर्म 6' से जुड़े बदलावों को सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया था।