
India Cyclone History : नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवात तूफान अर्नब तेजी से आगे बढ़ रहा है। तूफान के 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटे हो सकती है। मौसम विभाग ने तूफान के प्रभाव से 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ से अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। चक्रवात तूफान अर्नब से पहले भी भारत ने कई चक्रवातों का सामना किया है। इनमें 1977 का आंध्र प्रदेश चक्रवात, 1999 का ओडिशा सुपर साइक्लोन, 2013 का फैलिन, 2019 का फानी और 2020 का अम्फान प्रमुख हैं। इन आपदाओं के बाद भारत में मौसम पूर्वानुमान, चक्रवात चेतावनी और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
अक्टूबर 1999 को ओडिशा के पारादीप के पास आए सुपर साइक्लोन ने जमकर तबाही मचाई थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग के शोध के अनुसार, तूफान के केंद्र में हवा की गति 260 से 270 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई थी। समुद्र में उठी विशाल लहरों और बाढ़ ने तटीय इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया। इस आपदा में करीब 9,900 लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले 1977 में आंध्र प्रदेश के दिविसीमा क्षेत्र में आए चक्रवात ने भी करीब 10 हजार लोगों की जान ली थी।
बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवातों के नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र के एशिया-प्रशांत आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (ESCAP) के क्षेत्रीय पैनल की व्यवस्था के तहत रखे जाते हैं। इस प्रक्रिया में भारत समेत 13 देश शामिल हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग का नई दिल्ली स्थित क्षेत्रीय विशेषीकृत मौसम विज्ञान केंद्र निर्धारित तीव्रता तक पहुंचने वाले चक्रवातों को सूची के अनुसार नाम देता है।
भारत के अलावा बांग्लादेश, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन इस व्यवस्था में शामिल हैं। ये देश पहले से नामों की सूची उपलब्ध कराते हैं। सूची में नामों का इस्तेमाल तय क्रम से किया जाता है और एक बार इस्तेमाल किया गया नाम दोबारा नहीं रखा जाता।
चक्रवातों को नाम देने का मुख्य उद्देश्य चेतावनी जारी करने, मीडिया में सूचना प्रसारित करने और आम लोगों तक खतरे की जानकारी आसानी से पहुंचाने में मदद करना है। छोटे और स्पष्ट नामों से अलग-अलग तूफानों की पहचान करना आसान होता है। इससे प्रशासन, मौसम विशेषज्ञों और राहत एजेंसियों के बीच समन्वय भी बेहतर होता है।
| वर्ष | चक्रवात | प्रमुख नुकसान |
|---|---|---|
| 1977 | आंध्र प्रदेश चक्रवात | करीब 10 हजार मौतें; दिविसीमा क्षेत्र में भारी तबाही |
| 1999 | ओडिशा सुपर साइक्लोन | करीब 9,900 मौतें; व्यापक बाढ़ और संपत्ति का नुकसान |
| 2013 | फैलिन | ओडिशा और आंध्र प्रदेश में तेज हवाएं, भारी बारिश; बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित निकाला गया |
| 2014 | हुदहुद | विशाखापत्तनम और आसपास के क्षेत्रों में भारी नुकसान |
| 2018 | तितली | ओडिशा और आंध्र प्रदेश में जान-माल का नुकसान |
| 2019 | फानी | ओडिशा में मकानों, पेड़ों और बिजली व्यवस्था को भारी नुकसान |
| 2020 | अम्फान | पश्चिम बंगाल और सुंदरबन क्षेत्र में व्यापक तबाही |
| 2021 | ताउते | गुजरात सहित पश्चिमी तट पर तेज हवा और बारिश का असर |
| 2021 | यास | ओडिशा और पश्चिम बंगाल में नुकसान |
| 2023 | बिपरजॉय | गुजरात के तटीय क्षेत्रों और पश्चिमी भारत में असर |
| 2024 | दाना | ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश |
| 2025 | मोंथा | आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में नौ लोगों की मौत |