Delhi wall collapse accident: दिल्ली के हरिनगर इलाके में तेज बारिश के बाद एक दीवार गिर गई जिससे तीन बच्चियों समेत 7 लोगों की मौत हो गई। ये सभी लोग पास की झुग्गी बस्ती में रहते थे और हादसे के समय सो रहे थे।
Delhi wall collapse accident: दक्षिणी दिल्ली के(Jaitpur Harinagar accident) जैतपुर के हरिनगर गांव में बारिश की वजह से एक प्लॉट की बाउंड्री दीवार गिरने से (Delhi wall collapse accident) उसके नीचे दो बच्चों सहित आठ लोग दब गए। इस हादसे में तीन बच्चियों सहित सात जनों की मौत हो गई। ये सभी कूड़ा बीनने का काम करते थे। मूल रूप से पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के रहने वाले हैं। प्लॉट के अंदर दीवार के पास कुछ लोगों ने झुग्गी बना रखी थी। इन्हीं झुग्गियों में सो रहे लोगों के ऊपर दीवार का मलबा गिर गया। दिल्ली अग्निशमन सेवा के अनुसार, उन्हें दक्षिण पूर्वी दिल्ली के जैतपुर स्थित हरि नगर (Harinagar building collapse) में एक इमारत का एक हिस्सा गिरने की सूचना मिली है। दो दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंची हैं।
जानकारी के अनुसार हरिनगर गांव में एक खाली प्लॉट के किनारे कुछ परिवारों ने अस्थायी झुग्गियां बना रखी थीं। तेज बारिश के चलते प्लॉट की बाउंड्री वॉल अचानक गिर गई और सीधे झुग्गियों पर आ गिरी। दीवार के नीचे दबे आठ लोगों में से सात की मौत हो गई।
मृतकों में तीन बच्चियां- रविना (8), हसीना (8) और रुकसाना (7) शामिल हैं। इनके अलावा ओबीयुल (30), मुतजली (40), शफीकुल (26) और डोली (25) की भी मौत हो गई। ये सभी लोग कूड़ा बीनने का काम करते थे और मूल रूप से पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले से थे।
दिल्ली फायर सर्विस को देर रात हरिनगर से कॉल मिली कि एक इमारत का हिस्सा गिर गया है। तुरंत दो दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत बचाव अभियान शुरू किया गया। मलबा हटा कर शवों को बाहर निकाला गया और घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाउंड्री वॉल काफी पुरानी और जर्जर हो चुकी थी, बावजूद इसके कोई मरम्मत नहीं करवाई गई। लोग प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। दिल्ली सरकार ने हादसे पर दुख जताया है और मृतकों के परिजनों को आर्थिक मदद देने की बात कही है।
घटना के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सवाल उठ रहा है कि प्लॉट मालिक ने कमजोर दीवार की सुरक्षा क्यों नहीं की? दिल्ली नगर निगम से भी जवाब मांगा जा रहा है। पीड़ित परिवारों को इंसाफ दिलाने की मांग तेज हो गई है।
बहरहाल यह हादसा सिर्फ एक दीवार गिरने की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की गिरावट का संकेत है। राजधानी दिल्ली में बारिश होते ही दीवारें गिरना, सड़कों का धंसना और लोगों का मरना आम होता जा रहा है। झुग्गी बस्तियों में रहने वाले मजदूरों की जिंदगी आज भी जान जोखिम में डालकर जीने जैसी है।