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FEMA मामलों में महिलाओं को ED कार्यालय में बुलाया जा सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट

FEMA Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने 53 वर्षीय कनाडाई महिला की याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि FEMA जांच में महिलाओं को भी ED कार्यालय में बुलाया जा सकता है और CrPC धारा 160 लागू नहीं होती।
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दिल्ली हाईकोर्ट (IANS)

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने एक अहम निर्णय में स्पष्ट कर दिया है कि विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) की जांच के दौरान महिलाओं को भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की जांच में CrPC की धारा 160 महिलाओं पर लागू नहीं होती, यानी बयान केवल उनके निवास पर दर्ज कराने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

रिट याचिका खारिज

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने 53 वर्षीय कनाडाई नागरिक महिला की रिट याचिका खारिज कर दी, जिसमें ED द्वारा FEMA की धारा 37 के तहत जारी समन को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि महिला होने के नाते उसे ED कार्यालय में बुलाना उचित नहीं है और उसका बयान घर पर ही लिया जाना चाहिए।

CrPC की धारा 160 कोर्ट

कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा “FEMA की जांच आपराधिक नहीं, बल्कि सिविल-प्रशासनिक प्रकृति की है। इसलिए CrPC की धारा 160 जैसी कोई सुरक्षा यहाँ लागू नहीं होती। महिला का केवल घर पर बयान दर्ज करने का दावा पूरी तरह निराधार है।”

कोर्ट ने दिए स्पष्ट तर्क

कोर्ट ने यह भी बताया कि FEMA की धारा 37 के तहत ED को जो अधिकार मिले हैं, वे आयकर अधिनियम की धारा 131 के समान हैं और पूरी तरह सिविल प्रकृति के हैं। ऐसे में CrPC के प्रावधानों का कोई भी लागू होना संभव नहीं है।

याचिकाकर्ता के तर्क

  • ED द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज पहले ही जमा कर दिए हैं।
  • परिवार में चिकित्सकीय आपात स्थिति है।
  • लिंग के आधार पर व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी जानी चाहिए।

इन सभी दलीलों को कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि याचिका में कोई कानूनी आधार नहीं है। समन में हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं पाया गया और याचिका को “बिना किसी दम के” खारिज कर दिया गया।

Updated on:
02 Dec 2025 01:04 pm
Published on:
02 Dec 2025 01:04 pm