
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल
US-Israel Iran War: वेस्ट एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तेज होते युद्ध के बीच भारत सरकार ने आर्थिक प्रभावों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्र ने इंटर-मिनिस्टीरियल ग्रुप (IMG) का गठन किया है, जिसे व्यापारिक क्षेत्र में 'स्पेशल फोर्स' की तरह देखा जा रहा है। यह ग्रुप सप्लाई चेन की निगरानी करेगा, व्यापारिक रुकावटों को कम करेगा और निर्यातकों-आयातकों की मदद करेगा।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि यह ग्रुप दैनिक आधार पर बैठकें कर रहा है। इसमें वित्तीय सेवाएं विभाग, विदेश मंत्रालय, जहाजरानी मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और सीबीआईसी के प्रतिनिधि शामिल हैं। ग्रुप का फोकस शिपिंग, लॉजिस्टिक्स, निर्यात, महत्वपूर्ण आयातों में कमजोरियों की पहचान और समन्वित कार्रवाई पर है। गोयल ने एक्स पर लिखा, 'यह ग्रुप सप्लाई चेन रेजिलिएंस सुनिश्चित करेगा और व्यापार को सुचारू रखेगा।'
सरकार ने निर्यात संबंधी प्रक्रियाओं में लचीलापन लाने का फैसला किया है। इसमें निर्यात प्राधिकरणों में छूट, सीमा शुल्क में सुगम क्लीयरेंस, वित्तीय संस्थानों और बीमा कंपनियों से निर्यातकों के हितों की रक्षा शामिल है। विशेष रूप से एमएसएमई निर्यातकों और आवश्यक आयातों (जैसे तेल, गैस) पर फोकस है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि एक्सपोर्टर्स के साथ बैठक में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब एल-मंदब जैसे चोकपॉइंट्स पर जोखिमों की समीक्षा की गई।
युद्ध से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित होने से भारत के 85% से ज्यादा क्रूड ऑयल आयात पर खतरा है। ईंधन की कमी, उच्च कीमतें और लॉजिस्टिक्स में रुकावट की आशंका है। सरकार वैकल्पिक स्रोत (जैसे रूस) तलाश रही है और घरेलू मांग को प्राथमिकता दे रही है।
निर्यातकों के लिए DGFT हेल्पडेस्क: 1800-572-1550, 1800-111-550
ईमेल: adg1-dgft@gov.in
यह फैसला भारत की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने का संकेत है, ताकि युद्ध का असर न्यूनतम रहे।
Updated on:
03 Mar 2026 09:55 pm
Published on:
03 Mar 2026 09:52 pm
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