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दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला: निजता के मौलिक अधिकार का हिस्सा माना गया ‘भूल जाने का अधिकार’

Right to be Forgotten: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि ‘भूल जाने का अधिकार’ संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के मौलिक अधिकार का हिस्सा है।

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Jun 02, 2026
delhi high court
दिल्ली हाई कोर्ट - फाइल फोटो

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत निजता के मौलिक अधिकार का अभिन्न हिस्सा मानते हुए भूल जाने के अधिकार को मान्यता दे दी। जस्टिस सचिन दत्ता ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि ऑनलाइन न्यायिक दस्तावेजों से व्यक्तिगत जानकारी को हटाने या छिपाने की मांग की जा सकती है। जहां लगातार पहुंच के कारण उनकी निजता और प्रतिष्ठा को नुकसान हो रहा हो।

हाईकोर्ट ने इंटरनेट पर मौजूद सामग्री को डी-इंडेक्स,डी-लिंक करने या हटाने की मांग वाली याचिकाओं पर यह आदेश दिया है। इन याचिकाओं में तर्क दिया गया था कि निजता के अधिकार में भूल जाने का अधिकार भी शामिल है। जस्टिस दत्ता ने कहा कि पहचान छिपाने की प्रक्रिया से न्यायिक अभिलेखों की अखंडता को प्रभावित किए बिना निजता की रक्षा होनी चाहिए। बिना संपादित संस्करण, अदालती रिकॉर्ड में सुरक्षित रहेंगे और वैध कानूनी उद्देश्यों के लिए अदालत व अधिकारियों को उपलब्ध रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में 5 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति

सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के नेतृत्व वाले कॉलेजियम ने हाल ही में पांच नामों की सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी थी, जिन्हें अब मंजूरी मिल गई है। इन नियुक्तियों में चार विभिन्न हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए इन नामों को मंजूरी दी। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की।

उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के नए न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति शील नागू (पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट), न्यायमूर्ति चंद्रशेखर (बॉम्बे हाईकोर्ट), न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा (मध्य प्रदेश हाईकोर्ट), न्यायमूर्ति अरुण पल्ली (जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट) तथा वरिष्ठ अधिवक्ता वी. सुब्रमणि मोहना शामिल हैं। उन्होंने सभी नवनियुक्त न्यायाधीशों को शुभकामनाएं भी दीं।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई को सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रावधान किया जाएगा। सरकार इस बदलाव को लागू करने के लिए आगामी संसद सत्र में एक विधेयक पेश करेगी। मंजूरी मिलने के बाद वर्ष 1956 के संबंधित कानून में आवश्यक संशोधन किया जाएगा।

Published on:
02 Jun 2026 03:04 am