
Delhi SIR: दिल्ली और महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर वोटरों का नाम मतदाता लिस्ट से बाहर किया गया है। दिल्ली में 47 लाख और महाराष्ट्र में 2 करोड़ 7 लाख मतदाताओं के नाम फिलहाल ड्राफ्ट रोल से हटा दिया गया है। दिल्ली में करीब 97 लाख 53 हजार 507 मतदाताओं का रिकॉर्ड ही डिजिटाइज हो पाया है। दिल्ली में मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट से बाहर होने पर राज्य के पूर्व सीएम व आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने निर्वाचन आयोग पर तंज कसा है।
AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने X पर लिखा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आ गई है। 1.5 करोड़ में से 47 लाख वोटर के नाम नहीं हैं। भारत सरकार नाहक ही जनसंख्या को लेकर परेशान हो रही है। SIR के जरिए चुनाव आयोग हमारे देश की जनसंख्या 140 करोड़ से घटाकर 50 करोड़ कर देगा।
जिन लोगों का वोटर लिस्ट से नाम हटाया गया है। वह 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। इन दावों का निस्तारण यानी डिस्पोजल प्रोसेस 29 अक्टूबर 2026 तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद 4 नवंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
दिल्ली में SIR का काम 30 जून से 17 अगस्त तक चला। इसमें मतदाताओं से गणना प्रपत्र भरवाए गए। दिल्ली के कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से करीब 67 फीसदी ने ऑनलाइन व डिजिटल तरीके से फॉर्म जमा किए। यही आंकड़ा 97.5 लाख का ड्राफ्ट रोल शामिल हुआ। बचे हुए करीब 47.7 लाख मतदाताओं को कई कारणों से सूची से बाहर रखा गया। जैसे वे अभियान के दौरान उपलब्ध नहीं मिले, कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं, उनका निधन हो गया है, उनका नाम पहले से लिस्ट में डुप्लीकेट था, या अन्य वजहें रहीं।
विधानसभा क्षेत्रों के हिसाब से डिजिटल फॉर्म भरने की दर में भी काफी अंतर देखा गया। रोहिणी सीट पर सबसे ज्यादा भागीदारी (करीब 83%) रही, जबकि तुगलकाबाद में यह आंकड़ा सबसे कम (करीब 52%) रहा।