
Delhi NCR Firecracker Ban 2026: दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के दौरान पटाखे जलाने को लेकर जारी बहस अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। अदालत के सामने एक तरफ वायु प्रदूषण से निपटने की चुनौती है, तो दूसरी ओर धार्मिक भावनाओं और परंपराओं का सवाल भी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान साफ संकेत दिया कि इस मामले में ऐसा व्यावहारिक समाधान तलाशना जरूरी है, जिससे पर्यावरण की चिंता और नागरिकों की आस्था के बीच संतुलन बनाया जा सके।
दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी फैसले में व्यावहारिकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि यदि अदालत पटाखे जलाने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी करती है, तो लोग दिन में ही पटाखे फोड़ना शुरू कर सकते हैं। ऐसे में केवल आदेश जारी करना समस्या का प्रभावी समाधान नहीं माना जा सकता।
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि लोगों से अपील करने और पटाखे जलाने के लिए सीमित समय निर्धारित करने का विकल्प अभी मौजूद है। उन्होंने संकेत दिया कि इस मुद्दे पर ऐसा रास्ता निकालने की जरूरत है, जो जमीनी परिस्थितियों के अनुरूप हो। अदालत ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाए बिना संतुलित समाधान खोजने की बात कही।
सुनवाई में एक वकील ने दलील दी कि पटाखे फोड़ना धर्म के मौलिक अधिकार का हिस्सा नहीं है। उन्होंने पूजा-पाठ को धार्मिक आस्था से जुड़ा बताते हुए कहा कि पटाखे जलाना उसी श्रेणी में नहीं आता। इस तर्क को रखते हुए वकील ने टिप्पणी की कि पटाखे फोड़ने की परंपरा देखकर भगवान भी हैरान हो सकते हैं।
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने दोहराया कि अदालत किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करना चाहती। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाधान तलाशते समय मौजूदा हालात और व्यावहारिक पहलुओं को ध्यान में रखना होगा।
प्रदूषण के बीच नागरिकों की जिम्मेदारी अहम
दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण हवा की गुणवत्ता को और खराब कर सकते हैं। इसका असर खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ सकता है।
ऐसे में अदालत ने नागरिकों और नागरिक समाज से मौजूदा परिस्थितियों को समझने तथा अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा जताई। इसका संकेत साफ है कि प्रदूषण पर नियंत्रण केवल कानूनी आदेशों से नहीं, बल्कि लोगों के सहयोग और नियमों के पालन से भी संभव है।
15 अक्टूबर को अगली सुनवाई
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट अब 15 अक्टूबर को अगली सुनवाई करेगा। फिलहाल पटाखों पर प्रतिबंध, निर्धारित समय में उन्हें जलाने की संभावना और धार्मिक भावनाओं के सम्मान जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं। अगली सुनवाई में अदालत का रुख इस बहस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।