
Delhi Police FRS Cameras: दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक को लेकर चल रहे कॉकरोच जनतापार्टी के प्रोटेस्ट के बीच फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरे लगाने पर उठे सवालों पर सफाई दी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ये कैमरे प्रदर्शनकारियों पर नजर रखने या उनकी जासूसी करने के लिए नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगाए गए हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, असामाजिक तत्वों, वांटेड अपराधियों और अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने के लिए नई दिल्ली में कई जगहों पर FRS कैमरे लगाए गए हैं।
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, यह इंतजाम नई दिल्ली में मौजूदा सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए किया गया है। यह दावा गलत है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की जासूसी करने के मकसद से ये कैमरे लगाए गए थे। दिल्ली पुलिस पहले भी गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), होली, दिवाली, ईद और रामलीला जैसे बड़े आयोजनों और भीड़-भाड़ वाले मौकों पर सुरक्षा कारणों से अलग-अलग जगहों पर FRS कैमरे लगाती रही है।
पुलिस ने जंतर-मंतर विरोध स्थल के मुख्य एंट्री और एग्जिट पॉइंट पर चार हाई-रिज़ॉल्यूशन FRS यूनिट लगाई हैं। ये कैमरे सीधे दिल्ली पुलिस के सेंट्रल क्रिमिनल डेटाबेस से जुड़े हैं। ये हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे काफी दूर से भी चेहरे की पहचान करने में सक्षम हैं। जैसे ही कोई चेहरा पुलिस के क्रिमिनल डेटाबेस में मौजूद रिकॉर्ड से मेल खाता है, तुरंत संबंधित पुलिस यूनिट को अलर्ट भेजा जाता है ताकि जल्द कानूनी कार्रवाई की जा सके।
पुलिस के अनुसार, इस तकनीक का इस्तेमाल वॉन्टेड अपराधियों, भगोड़ों, हिस्ट्री-शीटर और पुलिस रिकॉर्ड में बैड कैरेक्टर के तौर पर दर्ज लोगों की पहचान करने के लिए किया जाता है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि इंटेलिजेंस एजेंसियों से मिले अलर्ट भी FRS कैमरे लगाने के पीछे एक बड़ा कारण हैं। इंटेलिजेंस इनपुट से पता चलता है कि सीमा पार के आतंकी संगठन भारत में चल रहे छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर नज़र रखे हुए हैं। ये समूह भीड़ का फायदा उठाकर अशांति फैलाने और देश में हालात को अस्थिर करने की साजिश रच रहे हैं। FRS लगाने से एक सुरक्षा घेरा बनेगा, जिससे ऐसे देश-विरोधी तत्वों को भीड़ में घुसने और गड़बड़ी फैलाने से रोका जा सकेगा।