
Dimaagi Naxal Controversy: स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से पीएम नरेंद्र मोदी ने संबोधन के दौरान दिमागी नक्सल शब्द का इस्तेमाल किया था। इसके बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने निशाना साधा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने ‘दिमागी नक्सल’ का एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। हमें इस बात पर आश्चर्य है कि इसके 24 घंटे के भीतर ही कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल होने पर गर्व है।
बीजेपी प्रवक्ता त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस और चिदंबरम को याद दिलाना चाहता हूं कि 13 अप्रैल 2006 को तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा था- यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि नक्सलवाद की समस्या हमारे देश के सामने अब तक की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं- सही कौन थे, डॉ. मनमोहन सिंह या पी. चिदंबरम?
बीजेपी प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पी. चिदंबरम के कार्यकाल का आंकड़ा भी दिखाया। उन्होंने कहा कि पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम के समय 180 जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे। उनके कार्यकाल में करीब 5 हजार निर्दोष लोगों की मौत हुई थी।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से दिए अपने संबोधन में नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद से निपटने में देश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन ऐसी मानसिकता के प्रति भी सतर्क रहने की आवश्यकता है, जो अलग-अलग माध्यमों से देश को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करती है।
मोदी की इसी टिप्पणी के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई। विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि सरकार की नीतियों की आलोचना या उससे असहमति रखने वाले लोगों को इस तरह के लेबल से जोड़ना उचित है या नहीं।
बता दें कि कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने पीएम नरेंद्र मोदी के दिमाग नक्सल वाले बयान पर पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा था- मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है।
कांग्रेस ने ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल की आलोचना करते हुए कहा है कि सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना या असहमति व्यक्त करना चरमपंथ के समर्थन के बराबर नहीं माना जा सकता।