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केरलम में चुनाव नतीजे से पहले ही कांग्रेस में CM पद के लिए लड़ाई शुरू! विवाद के बाद बड़े नेता को देनी पड़ी सफाई

केरलम चुनाव के नतीजे 4 मई को आएंगे लेकिन इससे पहले ही कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के लिए लड़ाई शुरू हो गई है। सीएम पद के लिए केसी वेणुगोपाल का नाम उछला है।

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Apr 16, 2026
कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Photo - ANI)

केरलम में विधानसभा चुनाव के लिए वोट पड़ चुके हैं। गिनती 4 मई को होनी है। लेकिन कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर खींचतान अभी से ही शुरू हो गई है। जिस पर दूसरी पार्टियों ने निशाना साधा है।

केरलम के मंत्री वी शिवनकुट्टी ने इसी मौके का फायदा उठाते हुए कांग्रेस पर जमकर तंज कसा है। शिवनकुट्टी ने कहा कि यूडीएफ (कांग्रेस गठबंधन) में यह परंपरा पुरानी है। जीत से पहले ही सीएम तय हो जाते हैं।

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उन्होंने आगे कहा कि इस बार तो कांग्रेस में तीन सीएम तय हो गए हैं व यह संख्या और बढ़ सकती है। उन्होंने पिछले चुनाव का भी जिक्र किया जब कांग्रेस ने मंत्रालयों के विभाग तक बांट लिए थे। लेकिन जीती एलडीएफ (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी गठबंधन)।

कांग्रेस नेता बोले- यह सब बंद करो

इस विवाद के बीच कांग्रेस विधायक रमेश चेन्निथला को आज मैदान में उतरना पड़ा। उन्होंने एएनआई से बात करते हुए कहा कि सीएम पद को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। 4 मई को गिनती होगी। अगर बहुमत मिला तो कांग्रेस हाईकमान सब तय कर लेगी।

उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को भी समझाया कि आंतरिक बातें सोशल मीडिया पर नहीं लड़ी जातीं। यह कांग्रेस का हमेशा से तरीका रहा है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की बातों से पार्टी समर्थक भ्रम में पड़ जाते हैं और यह पार्टी के लिए नुकसानदायक है। चेन्निथला का यह बयान साफ बताता है कि पार्टी के अंदर सच में कुछ न कुछ चल रहा है जिसे वे सार्वजनिक होने से रोकना चाहते हैं।

केसी वेणुगोपाल का नाम क्यों उछला?

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद के सुधाकरन ने हाल ही में फेसबुक पर एक पोस्ट लिखी। उन्होंने कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल की तारीफ की और इशारा किया कि यूडीएफ की जीत के बाद वेणुगोपाल को केरलम की राजनीति में अहम भूमिका निभानी चाहिए।

यहां एक पेच यह भी है कि वेणुगोपाल ने 9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में हिस्सा ही नहीं लिया। यानी वे विधायक भी नहीं हैं। फिर सीएम कैसे बनेंगे? यह सबसे बड़ा सवाल है। हालांकि, इसी पोस्ट ने CM की दावेदारी की बहस को और हवा दे दी।

78 फीसदी वोटिंग हुई लेकिन नतीजे अभी बाकी

केरल विधानसभा चुनाव में 78।03 फीसदी मतदान दर्ज हुआ जो काफी अच्छा माना जा रहा है। दोनों गठबंधन एलडीएफ और यूडीएफ दावा कर रहे हैं कि जनता उनके साथ है। लेकिन असली तस्वीर 4 मई को साफ होगी। तब तक CM की कुर्सी पर दावेदारी करना सिर्फ सियासी तमाशा है।

एलडीएफ को मिल गया सबसे बड़ा हथियार

शिवनकुट्टी का तंज बेवजह नहीं था। चुनाव से पहले अगर विपक्षी गठबंधन के अंदर इस तरह की खींचतान दिखे तो सत्तारूढ़ पार्टी को अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ती। कांग्रेस खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रही है।

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