
नई दिल्ली। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की बड़ी साजिश चल रही है, जिसमें खास तौर पर अल्पसंख्यक, दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है। नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए शिवकुमार ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की भी तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अपने किसी व्यक्तिगत या पार्टी हित के लिए नहीं, बल्कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं।
शिवकुमार ने कहा कि राहुल गांधी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। यह उनके लिए नहीं है और न ही कांग्रेस पार्टी के लिए। वोट देने का अधिकार जीने का अधिकार है। पूरे देश में जो कुछ हुआ है, वह सामने आ चुका है। यह देश की सबसे बड़ी साजिश है।
डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया कि हजारों कंप्यूटराइज्ड फॉर्म-7 एप्लीकेशन बीजेपी हेडक्वार्टर में पहले से तैयार किए गए और उनमें मतदाताओं की सटीक जानकारी भरकर स्थानीय कार्यकर्ताओं तक पहुंचाई गई। फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराने में किया जाता है।
उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक में एक लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई। शिवकुमार के मुताबिक, ये फॉर्म कथित तौर पर भाजपा मुख्यालय में तैयार किए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें खास तौर पर अल्पसंख्यक, दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं के नाम शामिल थे।
शिवकुमार ने कहा कि शिकायत दर्ज कराने के बाद कई BLOs के पास जाकर ये फॉर्म वापस लिए गए। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसे फॉर्म का एक पूरा बैग मौजूद है और बड़ी संख्या में इस तरह के आवेदन जमा किए गए हैं।
इस मामले में बेंगलूरु पुलिस ने मंगलवार को जयनगर विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मामले में दो भाजपा बूथ लेवल एजेंटों और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोप है कि फर्जी फॉर्म-7 आवेदन जमा कर 5,698 मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई।
यह मामला जयनगर थाने में कर्नाटक महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सौम्या रेड्डी की शिकायत पर दर्ज किया गया। प्राथमिकी के मुताबिक, कथित गड़बड़ी 16 जून से 5 अक्टूबर के बीच मतदाता सूची के संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान हुई।
शिकायत में भाजपा के बूथ स्तरीय अभिकर्ता रामकृष्ण और योगेश समेत अन्य पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने मतदाताओं के दूसरी जगह चले जाने का गलत दावा करते हुए फॉर्म-7 जमा किए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि अल्पसंख्यक समुदाय और भाजपा के खिलाफ माने जाने वाले मतदाताओं को निशाना बनाया गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर जयनगर के चार ब्लॉक निवासी रमेश और उनकी पत्नी रूपा की पहचान संबंधी जानकारी का उनकी अनुमति के बिना इस्तेमाल किया और बूथ स्तरीय अधिकारी लोकेश के पास कथित फर्जी हस्ताक्षर वाले आवेदन जमा किए। मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।