
Tamil Nadu Politics: डीएमके प्रवक्ताटीकेएस एलंगोवन ने अन्ना सीर योजना, चुनाव नियमों के उल्लंघन की शिकायत, नर्सों के प्रदर्शन, कानून व्यवस्था और तमिलनाडु के मछुआरों की रिहाई समेत कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार पर विभिन्न मामलों में गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी पार्टी का पक्ष रखा।
अन्ना सीर योजना को लेकर एलंगोवन ने दावा किया कि योजना के तहत केवल एक ग्राम सोने का सिक्का दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आठ ग्राम सोने का सिक्का देने की बात कहां है। डीएमके प्रवक्ता ने कहा कि सरकार की ओर से अब केवल एक ग्राम सोने का सिक्का दिए जाने की बात कही जा रही है, जबकि आठ ग्राम सोने के सिक्के को लेकर पहले चर्चा थी।
मदुरंतकम से डीएमके उम्मीदवार परंथमन के खिलाफ चुनाव नियमों के उल्लंघन की शिकायत पर एलंगोवन ने आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार ने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया है। उन्होंने बताया कि परंथमन डीएमके के प्रवक्ताओं में से एक हैं और वह दूसरे लोगों की ओर से उठाए गए मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखते हुए जवाब दे रहे हैं।
नर्सों के प्रदर्शन पर एलंगोवन ने तमिलनाडु सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में लोगों को विरोध करने का अधिकार नहीं है और सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान नहीं करती। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन करने का अधिकार है। सरकार को प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत करनी चाहिए, उनकी समस्याओं को समझना चाहिए और शिकायतों का समाधान करना चाहिए।
तमिलनाडु में कानून व्यवस्था की स्थिति पर डीएमके प्रवक्ता ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले चार महीनों में कई मौतें हुई हैं, जिनमें हिरासत में हुई मौतें भी शामिल हैं। एलंगोवन ने आरोप लगाया कि राज्य में कई लोगों की हत्या हुई, लेकिन सरकार की ओर से पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने ड्रग तस्करी की शिकायतों के मामलों में भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए।
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर को लिखे गए पत्र पर भी एलंगोवन ने प्रतिक्रिया दी। पत्र में श्रीलंका की हिरासत में मौजूद तमिलनाडु के 20 मछुआरों और जब्त की गई 270 मछली पकड़ने वाली नौकाओं की रिहाई के लिए तत्काल राजनयिक हस्तक्षेप की मांग की गई है। एलंगोवन ने कहा कि इन मछुआरों की गिरफ्तारी काफी पहले हुई थी और सरकार को उसी समय उनके लिए कदम उठाने चाहिए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान के दिन इस मुद्दे को उठाना चुनावी राजनीति का हिस्सा है और इसका उद्देश्य चुनाव में फायदा हासिल करना है।