प्रलय एक ठोस प्रणोदक, अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे स्वदेशी रूप से उन्नत मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणालियों के साथ विकसित किया गया है...
Pralay Missile Test: साल 2025 के आखिरी दिन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। दरअसल, स्वदेशी रूप से विकसित प्रलय मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। ओडिशा तट के पास चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से एक ही लॉन्चर से बेहद कम समय के अंतराल में दो मिसाइलें दागी गईं और दोनों मिसाइलों ने अपने लक्ष्य को पूरी तरह से हासिल किया।
रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक, ये परीक्षण सुबह करीब 10.30 बजे चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज के पास किए गए। दोनों मिसाइलों ने अपने निर्धारित मार्ग का सटीक पालन किया और सभी उड़ान उद्देश्यों को भी सफलतापूर्वक पूरा किया।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि प्रलय एक ठोस प्रणोदक, अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे स्वदेशी रूप से उन्नत मार्गदर्शन और नेविगेशन प्रणालियों के साथ विकसित किया गया है ताकि उच्च सटीकता सुनिश्चित हो सके। यह विभिन्न प्रकार के वारहेड ले जाने और कई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है।
मंत्रालय ने बताया कि हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत ने डीआरडीओ की कई अन्य प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग भागीदारों के सहयोग से इस मिसाइल को विकसित किया है।
बता दें कि इस मिसाइल को भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने का हथियार माना जा रहा है। यह 150 किलोमीटर से लेकर 500 किलोमीटर तक प्रहार करने की क्षमता रखती है। इस मिसाइल की 350 से 1000 किलोग्राम तक हथियार ले जाने की क्षमता है, जिसमें कवच रोधी वारहेड भी शामिल है।
बता दें कि प्रलय मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण करने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, सशस्त्र बलों, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और उद्योग जगत की सराहना की। उन्होंने कहा कि सफल प्रक्षेपण से प्रलय मिसाइल प्रणाली की विश्वसनीयता साबित हुई है।