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अंग्रेजी को माना जाएगा ‘विदेशी’ भाषा, नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी तीन भाषाओं की नीति

CBSE Latest Update: नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से तीन भाषाओं की नीति के अनुसार यदि कोई अन्य विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच, जर्मन) तीसरी भाषा के रूप में चुनी जाती है, तो उसे अब दो भारतीय भाषाओं के साथ पढ़ना होगा।

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भारत

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Saurabh Mall

Feb 27, 2026

CBSE Three-Language Policy

सीबीएसई : कक्षा 6 से तीन भाषाएं पढ़ाई जाएगी, 'विदेशी' भाषा के विकल्प में रहेगी अंग्रेजी (इमेज सोर्स: चैट GPT)

CBSE Three-Language Policy: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 6 से तीन भाषाओं की नीति लागू करने तैयारी की है। इसके तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भाषा भारतीय मूल की होंगी। तीसरी भाषा (आर3) के रूप में अंग्रेजी को 'विदेशी' भाषा माना जाएगा। उन स्कूलों में जहां कक्षा 6 में पहले से अंग्रेजी पढ़ाई जाती है, वहां अंग्रेजी को एकमात्र विदेशी भाषा के रूप में रखा जा सकता है, साथ में दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। सीबीएसई का यह फैसला नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा (एनसीएफएसई) 2023 की सिफारिशों पर आधारित है।

तीन भाषाओं की नीति के अनुसार यदि कोई अन्य विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच, जर्मन) तीसरी भाषा के रूप में चुनी जाती है, तो उसे दो भारतीय भाषाओं के साथ पढ़ना होगा। एनसीएफएसई के अनुसार, मध्य चरण (कक्षा 6-8) में तीसरी भाषा पर पर्याप्त समय दिया जाएगा, ताकि छात्र बुनियादी संचार कौशल विकसित कर सकें। कक्षा 9 और 10 में तीनों भाषाएं (आर1, आर2, आर3) जारी रहेंगी।

तीन भाषाओं की कैटेगरी-

तीन भाषा कैटेगरी के अनुसार आर-1 में छात्र की मातृभाषा, घरेलू भाषा, क्षेत्रीय भाषा या सबसे परिचित भाषा, आर-2 में आर-1 से अलग हिन्दी या अन्य भारतीय भाषा तथा आर-3 में अन्य भारतीय भाषा या विकल्प के रूप में विदेशी भाषा अंग्रेजी, फ्रेंच या जर्मन आदि शामिल होंगी।

तीसरी भाषा के लिए भी होगी लिखित परीक्षा-

2031 की कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा के लिए भी लिखित परीक्षा अनिवार्य होगी, जबकि वर्तमान में केवल दो भाषाओं की परीक्षा होती है। सीबीएसई तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, गुजराती, बंगाली आदि नौ भाषाओं के लिए कक्षा 6 का शिक्षण सामग्री तैयार कर रहा है। एनसीएफएसई में जोर दिया गया है कि भाषा शिक्षा छात्रों को उनकी संस्कृति, विरासत और समाज से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सीबीएसई का यह बदलाव बहुभाषावाद को बढ़ावा देने और छात्रों की भाषाई क्षमता मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है।

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