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क्या है भारत-EFTA समझौता TEPA? निवेश, रोजगार और तकनीकी सहयोग से जुड़ी अहम बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लिकटेंस्टाइन के प्रिंस एलोइस की मेजबानी की। भारत-EFTA समझौते के तहत 15 साल में 100 अरब डॉलर निवेश और 10 लाख रोजगार का लक्ष्य है।
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Updated: 27 Oct 2026, 10:56 PM IST
Liechtenstein Prince Alois
(फोटो-IANS)

Liechtenstein Prince Alois: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में लिकटेंस्टाइन के हेरिडिटरी प्रिंस एलोइस और हेरिडिटरी प्रिंसेस सोफी का स्वागत किया। इस दौरान राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के तहत दोनों देश अपनी विशेषज्ञता और क्षमताओं को जोड़कर आपसी लाभ वाली साझेदारी विकसित कर सकते हैं। राष्ट्रपति भवन की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी गई जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति मुर्मू ने दोनों अतिथियों के सम्मान में भोज का आयोजन भी किया। उन्होंने कहा कि लिकटेंस्टाइन की उन्नत विनिर्माण, इनोवेशन और वित्तीय सेवाओं में विशेषज्ञता को भारत के कुशल कार्यबल, विनिर्माण क्षमता और तेजी से बढ़ते बाजार के साथ जोड़ने से नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

TEPA के तहत 15 साल में 100 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य

भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते पर मार्च 2024 में हस्ताक्षर हुए थे। यह समझौता अक्टूबर 2025 से लागू है।संयुक्त बयान के मुताबिक, इस समझौते का एक प्रमुख लक्ष्य अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश जुटाना और ईएफटीए देशों के जरिए भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद करना है। भारत और लिकटेंस्टाइन ने इस समझौते के जरिए आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। दोनों पक्षों का मानना है कि एक-दूसरे की क्षमताओं का लाभ उठाकर व्यापार और निवेश के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर

भारत और लिकटेंस्टाइन ने कई ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है, जहां दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं। इनमें उन्नत विनिर्माण, मशीनरी और मशीन टूल्स, प्रिसिजन इंडस्ट्री, मेडिकल टेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष से जुड़ी इंडस्ट्री, स्वच्छ तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वित्तीय सेवाएं शामिल हैं। लिकटेंस्टाइन की विशेष तकनीकी विशेषज्ञता को भारत के बड़े बाजार और विकास की संभावनाओं के साथ जोड़कर इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना है।

प्रिंस एलोइस बोले- भारत के साथ संबंध मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध

भारत की अपनी पहली राजकीय यात्रा के दौरान प्रिंस एलोइस ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आमंत्रण और गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस उल्लेखनीय देश में लिकटेंस्टाइन की पहली राजकीय यात्रा के अवसर पर भारत आकर मैं बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूं। प्रिंस एलोइस ने कहा कि यह ऐतिहासिक यात्रा भारत के साथ संबंधों को लिकटेंस्टाइन की ओर से दिए जाने वाले महत्व को दर्शाती है। उन्होंने भारत के साथ व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बने इस सकारात्मक माहौल का लाभ उठाकर संबंधों को और मजबूत करने के लिए लिकटेंस्टाइन प्रतिबद्ध है।

इस साल दूसरी बार भारत आए प्रिंस एलोइस

प्रिंस एलोइस का यह इस साल भारत का दूसरा दौरा है। इससे पहले वह फरवरी में नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल हुए थे। मंगलवार को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में उनका औपचारिक स्वागत किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया। इस राजकीय यात्रा को दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है।

Updated on:
27 Oct 2026, 10:56 PM IST
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