राष्ट्रीय

चुनाव के दौरान पीएम मोदी का ममता बनर्जी पर तंज, कहा-‘झालमुड़ी मैंने खाई, लेकिन मिर्ची टीएमसी को लगी’

बंगाल चुनाव के दौरान पीएम मोदी ने एक सभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तंज कसा है। ‘विजय संकल्प सभा’ के नाम से आयोजित की गई थी रैली, जहां पीएम मोदी ने न सिर्फ राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की बल्कि ममता बनर्जी पर तंज भी कसा।

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Apr 23, 2026
Bengal Election 2026(AI Image-ChatGpt)

Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में आज यानी 23 अप्रैल को राज्य के कई सीटों पर चुनाव चल रहे हैं। साथ ही बाकि बची सीटों पर प्रचार का दौर जारी है। इसी प्रचार में पीएम मोदी ने एक बार फिर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तंज कसा है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय बयानबाजी का तापमान काफी ऊपर है। इसी बीच गुरुवार को पीएम मोदी ने नदिया जिले के कृष्णानगर में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया और मंच टीएमसी पर जमकर निशाना साधा। यह रैली ‘विजय संकल्प सभा’ के नाम से आयोजित की गई थी, जहां पीएम मोदी ने न सिर्फ राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की, बल्कि चुनावी माहौल को लेकर भी तीखे तंज कसे। अपने भाषण में उन्होंने एक हालिया मुद्दा भी उठाया, ‘झालमुड़ी’ वाला मामला, जो पिछले कुछ दिनों से चर्चा में बना हुआ है।

क्या कहा पीएम मोदी ने?


दरअसल, कुछ समय पहले पीएम मोदी ने बंगाल दौरे के दौरान सड़क किनारे झालमुड़ी खाई थी। इस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कटाक्ष करते हुए इसे 'ड्रामा' बताया था। उन्होंने कहा था कि यह सब पहले से तय था और सिर्फ दिखावे के लिए किया गया। अब उसी पर जवाब देते हुए पीएम मोदी ने मंच से कहा, 'मैंने झालमुड़ी जरूर खाई है, लेकिन मिर्ची टीएमसी को लग रही है।' उनके इस बयान पर सभा में मौजूद लोगों ने जोरदार प्रतिक्रिया दी। पीएम मोदी यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि 4 मई को जब चुनाव के नतीजे आएंगे, तब बंगाल में जश्न मनाया जाएगा। 'मिठाई भी बंटेगी और झालमुड़ी भी।' इस बयान को साफ तौर पर टीएमसी पर राजनीतिक हमला माना जा रहा है।

पीएम ने ज्यादा मतदान की अपील की


अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने मतदान की बात भी उठाई। उन्होंने कहा कि पहले चरण में वोटिंग जारी है और लोगों में उत्साह दिख रहा है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि इस बार रिकॉर्ड संख्या में मतदान होना चाहिए। चुनावी हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने टिप्पणी की। पीएम मोदी के मुताबिक, पिछले कई दशकों की तुलना में इस बार हिंसा कम हुई है, जिसे उन्होंने चुनाव आयोग की बड़ी उपलब्धि बताया। भाषण के दौरान उन्होंने बंगाल की संस्कृति का जिक्र करते हुए स्थानीय खान-पान और परंपराओं को भी छुआ। लेकिन साथ ही, उनके शब्दों में राजनीतिक धार भी साफ दिखी।

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