
ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान ग्राहक से उत्पाद के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से ज्यादा कीमत वसूलना एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को महंगा पड़ गया। मामला तेलंगाना का है। मामले में निजामाबाद जिला उपभोक्ता आयोग ने शिकायतकर्ता की शिकायत पर प्लेटफॉर्म को 8,110 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है। छात्र ने आरोप लगाया था कि उसने ऑनलाइन 1,135 रुपये में जूते खरीदे थे, लेकिन जूते के अंदर 1,025 रुपये MRP लिखी हुई थी।
निजामाबाद जिला उपभोक्ता आयोग ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को 110 रुपये अतिरिक्त वसूली की राशि लौटाने के साथ सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 3,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। इसके अलावा, मुकदमे के खर्च के तौर पर 5 हजार रुपये देने को भी कहा गया। आयोग ने भुगतान के लिए 45 दिन की समयसीमा तय की है।
20 वर्षीय छात्र ने मई 2025 में एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से रनिंग शूज खरीदे थे। इसके लिए उसने 1,135 रुपये का भुगतान किया था। लेकिन जब उसने जूते खोलकर देखे तो उसमें 1,025 रुपये एमआरपी लिखी हुई थी।
इसका मतलब है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ने छात्र से 110 रुपये अधिक लिए थे। इसके बाद उसने संबंधित ई-कॉमर्स वेबसाइट से शिकायत की, लेकिन उसके मुताबिक, उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
बाद में छात्र ने निजामाबाद जिला उपभोक्ता आयोग में अपनी शिकायत दर्ज कराई और अतिरिक्त वसूली की राशि वापस लेने के साथ मुआवजे की भी मांग की। छात्र ने खुद ही अपना पक्ष रखते हुए मामले की पैरवी की।
मामले में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की ओर से अधिवक्ता कोटागिरी मारुति ने शिकायत को निराधार, भ्रामक और मनगढ़ंत बताते हुए आरोपों से इनकार किया।
उन्होंने आयोग में दलील देते हुए कहा कि वह केवल खरीदारों और स्वतंत्र थर्ड-पार्टी विक्रेताओं के बीच ऑनलाइन मार्केटप्लेस उपलब्ध कराता है। उत्पादों की बिक्री और आपूर्ति संबंधित विक्रेता करते हैं, इसलिए उनकी कीमत तय करने के लिए प्लेटफॉर्म को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
प्लेटफॉर्म ने यह भी बताया कि छात्र की शिकायत विक्रेता तक पहुंचाई गई थी। उसके अनुसार, विक्रेता ने MRP और ऑनलाइन कीमत के बीच अंतर स्वीकार करते हुए 110 रुपये लौटाने की पेशकश की थी। हालांकि, छात्र ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
प्लेटफॉर्म ने इसी आधार पर दलील दी कि जब विक्रेता अतिरिक्त राशि लौटाने के लिए तैयार था, तब उसे जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
जिला उपभोक्ता आयोग ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि वह ऑनलाइन मार्केटप्लेस की जिम्मेदारी है कि वह अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले खरीदारों और विक्रेताओं को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराए। केवल मध्यस्थ होने या उत्पाद का निर्माता अथवा विक्रेता नहीं होने के आधार पर प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
आयोग के मुताबिक, प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को गुमराह करने या उसके माध्यम से किसी तरह की गलत जानकारी अथवा अनुचित व्यवहार की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
आयोग ने यह भी माना कि अगर कोई थर्ड-पार्टी विक्रेता सही उत्पाद देने में विफल रहता है, कीमत में गड़बड़ी करता है या अपने कानूनी दायित्वों का पालन नहीं करता, तो ऐसी स्थिति में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को भी जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि शिकायत में संबंधित विक्रेता को पक्षकार नहीं बनाए जाने के आधार पर भी प्लेटफॉर्म को स्वतः जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता।