
ED investigation, foreign funding: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दो विदेशी संस्थाओं के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। दोनों संस्थाओं पर भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने और ब्रिटेन की एक फर्म को 10 लाख डॉलर के संदिग्ध ट्रांसफर का आरोप है। जांच एजेंसी की जांच में यह सामने निकलकर आया है कि कैरिबयन देश व टैक्स हेवन सेंट किट्स एंड नेविस में पंजीकृत टीसीसी डिजिटल मार्केट्स लिमिटेड द्वारा पैसा
भारत में संस्थाओं और व्यक्तियों तक पहुंचा। ED का मानना है कि यह पैसा जर्मनी, दुबई, लिथुआनिया, कनाडा, सेंट किट्स और ब्रिटेन समेत कई देशों से गुजरते हुए भारत पहुंचा।
ED की जांच में यह भी सामने आया है कि 10 लाख डॉलर के संदिग्ध ट्रांसफर का असली स्रोत जर्मनी का डॉ. मैथियास कार्ल वोग्ट ट्रस्ट है। जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, जर्मन कानून से बचने के लिए ट्रस्ट ने पहले यह रकम लिथुआनिया की कंपनी एक्सबेस डिजिटल यूएबी को भेजी। इसके बाद पैसा ब्रिटेन की संस्था के पास पहुंचा और फिर भारत लाया गया।
जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों को डॉ. वोग्ट का एक बिना तारीख वाला पत्र मिला, जिसमें कहा गया है कि भुगतान डिजिटल करेंसी में किया गया था। ED के अधिकारियों का मानना है कि ये डिजिटल एसेट दुबई और लिथुआनिया की संस्था तक हवाला (वित्तीय लेनदेन का अवैध तरीका) के जरिए पहुंचे थे। फिर वहां से ब्रिटेन भेजे गये और बाद में भारत पहुंचे।
ब्रिटेन की इस फर्म को फरवरी से मार्च 2026 के बीच अपने एयरवॉलेक्स (यूके) लिमिटेड खाते में 10 लाख डॉलर मिले। यह रकम अलग-अलग माध्यमों और संस्थाओं की कई परतों से गुजरी, जिनमें लिथुआनिया में पंजीकृत एक संस्था भी शामिल है।
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अंत में यह पैसा सेंट किट्स एंड नेविस की फर्म की ओर से अनुदान के रूप में ब्रिटिश फर्म को दो किश्तों में भेजा गया। ये किश्तें 67,006 और 71,746 पाउंड की थीं। इसके बाद रकम भारत में अंतिम लाभार्थियों तक पहुंची।
ईडी को एक और लेन-देन का पता चला है। कनाडा में पंजीकृत जेडबेस डिजिटल इंक ने फरवरी में उसी ब्रिटिश फर्म के एयरवॉलेक्स खाते में 5 लाख डॉलर भेजे थे। दोनों कथित लेन-देन को मिलाकर कुल रकम 15 लाख डॉलर होती है।