
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और वरिष्ठ पत्रकार निधि राजदान ने जीवन का नया अध्याय शुरू किया है। (फोटो- X/@OmarAbdullah)
शेख अब्दुल्ला के पोते और फारूक अब्दुल्ला के बेटे उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में निधि राज़दान के साथ नई शादीशुदा ज़िंदगी शुरू की है । उमर ने यह शादी करने के लिए अपनी पहली शादी तोड़ी है और करीब 15 साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी है। उनके पिता ने भी बहन से हुई सगाई तोड़ कर इंग्लैंड में एक नर्स से शादी की थी, जबकि उनके दादा की शादी एक तलाक़शुदा महिला से करवाई गई थी। उस महिला की मां दूध बेचने वाले की बेटी थी। एक दिन वह दूध देने होटल गईं तो विदेशी होटल मालिक का उन पर दिल आ गया था। अब्दुल्ला खानदान की इन शादियों के बारे में पढ़िए:
फारूक अब्दुल्ला और मोली के बेटे उमर अब्दुल्ला का जन्म 1970 में हुआ। वह इस दंपती की पहली संतान हैं। 1994 में पायल नाथ (मेजर जनरल रामनाथ की बेटी) से जब उनकी पहली शादी हुई तो वह 25 साल के भी नहीं हुए थे। तब वह दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में काम करते थे। पायल से उनकी मुलाक़ात वहीं हुई। इसके चार साल बाद उमर राजनीति में आ गए।
उमर की दूसरी पत्नी निधि राजदान पत्रकार हैं। इन दोनों के प्यार की कहानी के बारे में आधिकारिक रूप से ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं है। निधि की उम्र उमर से करीब सात साल कम है और वह भी पहले शादीशुदा रह चुकी हैं।
उमर से अपनी शादी उन्होंने 31 अक्तूबर को सार्वजनिक की। बताया जाता है कि उन्होंने अपनी शादी 30 अक्तूबर, 2026 को रजिस्टर्ड करवाई थी। हालांकि, शादी कुछ दिन पहले ही हो गई थी।
अबदुल्ला ने पायल से 2011 में तलाक लिया था। इस पर लंबी कानूनी लड़ाई भी चली, जो 31 जुलाई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट में 'आपसी सहमति से निपटान' के साथ खत्म हुई।
शेख अब्दुल्ला और अकबर जहां के सात बच्चे हुए। दो बेटियां जन्म लेने के कुछ समय बाद ही चल बसी थीं। सबसे बड़ी बेटी खालिदा के जन्म के दो साल बाद फारूक अब्दुल्ला का जन्म हुआ था। फारूक ने अंग्रेज महिला से शादी की।
फारूक 1955 में डॉक्टरी पढ़ने के लिए जयपुर के सवाई मान सिंह (एसएमएस) मेडिकल कॉलेज गए। यहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह इंग्लैंड चले गए। वह वहीं बसना चाहते थे। वहां उन्होंने एक अस्पताल में नौकरी कर ली। वहीं मोली प्रिचर नाम की एक नर्स से उनकी मुलाक़ात हुई। फारूक को वह अच्छी लगीं। उन्होंने उनसे करीबी बढ़ाना शुरू किया। मोली ने पहले तो फारूक के साथ डेट करने से मना कर दिया, क्योंकि वह अलग किस्म की लड़की थीं। सिगरेट-शराब से दूर रहने वाली साधारण लड़की। फारूक दिलफेंक किस्म के मर्द थे। उन्हें यह समझ में आ गया था कि बीवी के रूप में मोली इंग्लैंड में उनके बसने और उनका घर बसाने में बड़ी मददगार साबित होगी। इसलिए उनके इंकार को हां में बदलने के लिए फारूक ने पूरा ज़ोर लगा दिया। अंत में वह कामयाब रहे। मोली ने डेट के लिए हां कर दी थी।
मोली का परिवार साधारण था। उन्हें जब पता चला कि एक मुस्लिम लड़का उसे बीवी बनाना चाहता है तो परिवार में कोहराम मच गया था। फारूक परिवार वालों से मिले और उन्हें भरोसा दिलाया कि वह न तो चार बीवियां रखने वाले हैं और न ही तीन बार तलाक कह देने भर से उनकी बेटी का रिश्ता टूटने वाला है।
फारूक ने मोली के परिवार को तो किसी तरह मना लिया। अब अपने परिवार को मनाना था। यहां मुश्किल ज्यादा थी, क्योंकि इंग्लैंड जाने से पहले उनकी सगाई हो चुकी थी। जिनसे सगाई हुई थी वह रिश्ते में उनके चाचा की बेटी थीं। फारूक ने पिता को फोन किया। पिता गुस्सा हो गए। उन्होंने कहा- ये तुम्हारा फैसला है तो चाचा को तुम ही बताओ। तुम्हें उनसे माफी मांगनी होगी। मैं नहीं मांगूंगा।
फारूक में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह चाचा या उनके परिवार से बात करें। उन्होंने उनसे फोन पर संपर्क करना भी छोड़ दिया। लेकिन बात तो चाचा तक पहुंच ही गई थी। तब उन्होंने फारूक को चिट्ठी लिखी और सफाई देने के लिए कहा। इसके बाद लड़की के भाई की फारूक से बात हुई। उन्हें जो कहना था कहा, लेकिन उनके इस फैसले से चाचा का पूरा परिवार बड़ा आहत था। उनके चाचा और पिता के परिवार में दूरियां बढ़ गईं। उधर, इंग्लैंड में 14 सितंबर, 1968 को फारूक ने मोली से शादी कर ली। अगले साल दोनों भारत आए तो शेख अब्दुल्ला ने उनका निकाह करवाया। इसके बाद दोनों फिर इंग्लैंड लौट गए।
उमर के दादा और फारूक के पिता शेख अब्दुल्ला भारत के 20वीं सदी के इतिहास के चुनिंदा प्रभावशाली व्यक्तियों में गिने जाते हैं। वह 1948 से 1953 तक कश्मीर के वजीर-ए-आजम रहे। वह 'दिल्ली दरबार' (सरकार) के चहेते हुआ करते थे, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब उन्हें लंबा वक्त नजरबंदी में बिताना पड़ा। 1982 में 76 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा था।
शेख अब्दुल्ला 5 दिसंबर, 1905 को श्रीनगर से कुछ मील दूर सौरा के एक परिवार में पैदा हुए थे। उनके जन्म से दो महीने पहले पिता शेख मोहम्मद इब्राहिम का निधन हो गया था। विधवा मां और बड़े भाइयों ने अब्दुला को पाला-पोसा।
अब्दुल्ला का परिवार शालों का कारोबार करता था और अच्छा कमाता था। उन्हें पढ़ने के लिए लाहौर और फिर अलीगढ़ भेजा गया। 1930 में अब्दुल्ला ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से एमएससी की डिग्री ली। उनकी शादी अकबर जहां से हुई। वह स्लोवाक और ब्रिटिश मूल के माइकल हेनरी (हैरी) नेडू (उर्फ शेख अहमद हुसैन) की बेटी थीं। उनके पिता का होटल का कारोबार था। पुणे, लाहौर, श्रीनगर जैसे कई शहरों में नेडू होटल नाम से उनके शाही होटल चलते थे।
शेख अब्दुल्ला की शादी अक्तूबर 1933 में हुई थी। तब तक वह पूरी तरह राजनीति में आ चुके थे। उन्होंने जम्मू कश्मीर मुस्लिम कॉन्फ्रेंस नाम से अपनी पार्टी भी बना ली थी। 28 साल उम्र हो गई थी तो दोस्त-रिश्तेदार लगातार घर बसाने के लिए कहा करते थे। उन्हें राजनीति से फुर्सत ही नहीं थी। इसी बीच उनके करीबियों ने अकबर जहां के पिता से संपर्क किया। वह हेनरी की पहली संतान थीं। पूंछ के मुफ्ती जियाउद्दीन और लाहौर में बसे कश्मीरी डॉ मोहम्मद इकबाल ने अब्दुल्ला और अकबर की शादी में अहम भूमिका निभाई थी।
शादी से पहले दोनों की सगाई हुई थी, लेकिन इसके कुछ ही दिन बाद अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर लिया गया था। उन्हें ऊधमपुर में रखा गया। वहां से वह अकबर जहां को खत लिखा करते थे। छह महीने यही सिलसिला चला। इसके बाद जब रिहाई हुई तो निकाह हुआ। अकबर की एक शादी टूट चुकी थी, लेकिन अब्दुल्ला उन्हें पाकर बहुत खुश थे। आत्मकथा 'आतिश-ए-चिनार' में उन्होंने पत्नी की खूब तारीफ की है और उन्हें अपने जीवन का बड़ा संबल बताया है।
अकबर जहां के पिता और शेख अब्दुल्ला के ससुर माइकल हेनरी ने इस्लाम कबूल कर लिया था और शेख अहमद हुसैन नाम रखा था। उन्होंने गुलमर्ग की गूजर लड़की से शादी की थी। उनकी शादी की भी एक अलग ही कहानी है, जो आदित्य सिन्हा ने फारूक अब्दुल्ला की जीवनी 'Kashmir's Prodigal Son- A Biography' में बताई है।
किस्सा कुछ इस तरह है कि अकबर जहां के नाना गुलमर्ग में हेनरी के होटल में रोज दूध देने जाया करते थे। एक सुबह होटल में हेनरी नेडू आराम फरमा रहे कि उन्हें चूड़ियों की खनक सुनाई दी। उन्होंने देखा कि एक लड़की दूध लेकर आ रही है। लड़की दूधवाले की बेटी थी। हेनरी का उस पर दिल आ गया और उन्होंने प्रपोज़ कर दिया। शादी के लिए हेनरी ने इस्लाम कबूल कर लिया। उनके परिवार वालों ने नाता तोड़ दिया, लेकिन उन्होंने किसी की परवाह नहीं की और गूजर लड़की को पत्नी बना कर नए सिरे से ज़िंदगी शुरू की। उन्होंने अपना अलग कारोबार शुरू किया और अच्छी कामयाबी हासिल की।
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Updated on:
7 Nov 2026, 11:24 AM IST
Published on:
7 Nov 2026, 11:24 AM IST
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