राष्ट्रीय

बंगाल चुनाव के बीच फिर से ED की एंट्री, कई ठिकानों पर की गई छापेमारी

पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच ED की कार्रवाई हुई है, फरार आरोपी सोना पप्पू से जुड़े ठिकानों पर छापे। साथ ही पीडीएस गेहूं घोटाले में कई शहरों में रेड। जांच में बड़े नेटवर्क और अवैध लेन-देन के संकेत, आने वाले दिनों में और खुलासों की संभावना है।

2 min read
Apr 26, 2026
ED

ED: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का माहौल पहले से ही गरम है, और इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल और बढ़ा दी है। रविवार को ED ने कोलकाता के कई इलाकों में छापेमारी की। ये कार्रवाई किसी आम मामले में नहीं, बल्कि एक फरार आरोपी ‘सोना पप्पू’ से जुड़े जमीन कब्जाने और वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों को लेकर की गई। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी की टीम आनंदपुर और अलीपुर इलाके में दो कारोबारियों के घर पहुंची। बताया जा रहा है कि इन लोगों के तार सोना पप्पू से जुड़े हो सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जांच के दौरान कुछ अहम जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर ये छापे मारे गए। एजेंसी अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या इन कारोबारियों ने किसी तरह अवैध पैसों के लेन-देन में भूमिका निभाई थी।

सोना पप्पू का नाम पिछले कुछ समय से जमीन कब्जाने और आर्थिक धोखाधड़ी के मामलों में सामने आता रहा है। वह फिलहाल फरार है, लेकिन जांच एजेंसियों का मानना है कि उसके कई प्रभावशाली लोगों से संबंध रहे हैं। यही वजह है कि अब जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। आने वाले दिनों में और भी जगहों पर कार्रवाई हो सकती है।

जान लें डिटेल्स


इसी बीच ED की एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़े गेहूं घोटाले को लेकर है। इस मामले में कोलकाता, बर्दवान और हाबरा समेत नौ ठिकानों पर छापेमारी की गई। जांच का केंद्र उन सप्लायर्स और एक्सपोर्टर्स पर है, जिनका नाम इस गड़बड़ी में सामने आया है। यह पूरा मामला उस शिकायत से जुड़ा है, जो घोजाडांगा लैंड कस्टम्स स्टेशन के एक अधिकारी ने दर्ज कराई थी। आरोप है कि गरीबों के लिए तय किया गया गेहूं बड़ी मात्रा में सिस्टम से बाहर निकाल लिया गया। फिर उसे सस्ते में हासिल करके खुले बाजार में महंगे दामों पर बेच दिया गया।

ED कर रही जांच


जांच एजेंसी का कहना है कि इस पूरे खेल में कई लोग शामिल हो सकते हैं, जैसे सप्लायर, डीलर, डिस्ट्रीब्यूटर और बिचौलिए। यानी यह सिर्फ एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क की तरफ इशारा करता है। फिलहाल ED दोनों मामलों की गहराई से जांच कर रही है। जैसे-जैसे नई कड़ियां जुड़ रही हैं, वैसे-वैसे इस पूरे मामले का दायरा और बड़ा होता जा रहा है। चुनावी माहौल में ऐसी कार्रवाइयों ने राज्य की राजनीति को भी और संवेदनशील बना दिया है।

Updated on:
26 Apr 2026 03:28 pm
Published on:
26 Apr 2026 03:26 pm
Also Read
View All