डंकी रूट से अवैध इमिग्रेशन कराने वाले नेटवर्क के खिलाफ ED ने बड़ी कार्रवाई की है। इसके लिए प्रवर्तन निदेशालय दिल्ली-पंजाब समेत कई राज्यों के 13 ठिकानों पर छापेमारी की।
ED Conducts Raids on Donkey Route Scam: ईडी ने लोगों को डंकी रूट के जरिए अमेरिका भेजने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली-पंजाब समेत कई राज्यों के 13 ठिकानों पर छापेमारी की। इस छापेमारी में ईडी ने भारी मात्रा में नकदी, सोना और चांदी जब्त की है। ये छापे गुरुवार को दिल्ली, जालंधर, पानीपत, कुरुक्षेत्र और करनाल में मारे गए। ईडी ने यह कार्रवाई फरवरी में अमेरिका से 330 भारतीयों को डिपोर्ट करने से जुड़े मामले में की गई। यह कार्रवाई ईडी की जालंधर यूनिट ने की।
अधिकारियों ने दावा किया कि दिल्ली के एक ट्रैवल एजेंट के ठिकाने से 4.62 करोड़ रुपए कैश, 313 किलो चांदी और 6 किलो सोने के बिस्किट जब्त किए हैं। इन सबकी कीमत करीब 20 करोड़ रुपए बताई जाती है। जांचकर्ताओं ने छापों के दौरान मिले फोन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से कुछ आपत्तिजनक चैट भी बरामद की हैं।
अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा में एक मुख्य आरोपी के ठिकाने से 'डंकी' बिजनेस से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेज मिले हैं। आरोप है कि एजेंट अवैध रूप से अमरीका जाने वाले लोगों के प्रॉपर्टी के दस्तावेज अपने कमीशन की रकम की गारंटी के तौर पर रखते थे।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने जुलाई में डंकी मामले में पहली बार छापेमारी की थी। हाल ही में कुछ ट्रैवल एजेंटों की 5 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की थी। इसी दौरान इस रैकेट से जुड़े लोगों की पहचान की गई।
गौरतलब है कि पंजाब और हरियाणा पुलिस की ओर से फरवरी, 2025 में अमरीका की ओर से सैन्य कार्गो विमानों में 330 भारतीय नागरिकों को भारत वापस भेजने के संबंध में मामला दर्ज किया गया था। इसी मामले में ईडी जांच कर रही थी। इन मामलों में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। ईडी डंकी रूट सिंडिकेट के हवाला नेटवर्क को भी खंगाल रही है।
डंकी रूट का मतलब अवैध रास्तों से अमरीका पहुंचना होता है। इसके लिए ट्रैवल एजेंट भारी रकम लेते हैं। डंकी रूट का पहला रास्ता मेक्सिको बॉर्डर के जरिए है। ट्रैवल एजेंट मेक्सिको बॉर्डर पर पहुंचा देते हैं, जहां उन्हें अमरीकी पुलिस पकड़ कर कैंप में ले जाती है। उन्हें चार-पांच दिन में कोई जानकार लेने आ जाता है, तो ठीक नहीं तो छोड़ दिया जाता है। इन पर अमरीकन पुलिस नजर रखती है। दूसरा रास्ता पनामा के जंगलों से है, जो कि बहुत खतरनाक है। तीसरा रास्ता कनाडा के रास्ते है, क्योंकि अमरीका में वर्क वीजा की डिमांड बहुत कम है, इसलिए लोग अवैध तरीके से ही जाते हैं।