Educational Freedom: आजादी के लिए शिक्षा या शिक्षा की आजादी क्यों चाहिए? शिक्षा और आजादी किस तरह एक दूसरे के पर्याय हैं, इस बारे में पूनम भाटिया का जरूरी लेख पढ़ें।
Freedom in Education: शिक्षा में आज़ादी का अर्थ है शिक्षा की आज़ादी और आज़ादी की शिक्षा। यानी वह शिक्षा जो स्वतंत्र सोच वाले, विवेकशील, विचारशील, वैज्ञानिक बोध वाले नागरिक पैदा करे और एक न्यायसंगत तथा समतामूलक समाज का निर्माण करने में सक्षम हो। किसी भी तरह की तंग नज़री की जगह हर तरह की आज़ाद ख़याली विकसित करती हो। ऐसी शिक्षा और ऐसी शिक्षा व्यवस्था। शिक्षा यानी कि लिखे हुए, कहे हुए को मान लेने की कूपमण्डूकता की जगह सवाल कर सकने का, असहमत हो सकने का साहस दे। सहमति और असहमति का विवेक दे।
शिक्षा जो विद्यार्थी और शिक्षक को ही नहीं, पूरे समाज को अपने विचारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दे ताकि वे बिना किसी भय या दबाव के ज्ञान प्राप्त कर सकें और अपने विचारों को साझा कर सकें। इसके कुछ अर्थों और संदर्भों को इस तरह समझते हैं…
शिक्षा में आज़ादी ना होने के कई नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं, जैसे- इसके बिना विद्यार्थियों को अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने की अनुमति नहीं मिल पाएगी, जिससे स्वतंत्र चिंतन की कमी के साथ रचनात्मकता व नवाचार की भी कमी होगी। जिसे हम अन्य देशों की तुलना में देख भी पाते हैं। इस आज़ादी के बिना, लोकतंत्र की कमजोरी साफ साफ परिलक्षित होगी क्योंकि शिक्षा में आज़ादी नई पीढ़ी को जागरूक बनाएगी। यह जागरूकता लोकतंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है। विचारों को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने की अनुमति नहीं होने पर, मानसिक दासता की स्थिति उत्पन्न होगी। जिसे हम महसूस भी कर रहे हैं। तमाम तरह के भेदभावपूर्ण जीवन और सोच में उलझे हुए हैं। कहीं धर्म, कहीं जाति,कहीं क्षेत्रवाद, कहीं लैंगिक भेदभाव से भरे हम एक रुग्ण समाज के रूप में ढलते गए। हम लकीर के फकीर बन रहे हैं। सामाजिक प्रगति में भी इससे कमी होगी क्योंकि नए और अनोखे विचारों का विकास नहीं हो पाएगा। व्यक्तिगत विकास की कमी होगी। इसको आज के परिप्रेक्ष्य में देखें तो समझ व्यापक हो पाएगी। आजाद ख़याली को विकसित करती शिक्षा व्यवस्था हमें सपने देखना सिखाती है, संघर्ष करना, जीवन पथ पर जूझना और असफल होकर भी सीखने देने का धैर्य प्रदान करती है।
(पूनम भाटिया, राज. उ. प्रा. विद्यालय, बंबाला, सांगानेर शहर, जयपुर, राजस्थान में प्रधानाध्यापक हैं। यह लेख उनके निजी विचार हैं।)