E-Service in High Court: देश चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (CJI DY Chandrachud) ने कहा कि लोकतंत्र को वास्तव में फलने-फूलने के लिए सभी नागरिकों को राष्ट्र की संस्थाओं से वास्तव में जुड़ाव महसूस करना चाहिए।
E-Service in High Court: देश चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (CJI DY Chandrachud) ने शनिवार को कहा कि लोकतंत्र को वास्तव में फलने-फूलने के लिए सभी नागरिकों को राष्ट्र की संस्थाओं से वास्तव में जुड़ाव महसूस करना चाहिए। न्यायपालिका से लोगों के जुड़ाव में भाषा सबसे बड़ी बाधा है। देश के हाईकोर्ट ज्यादातर काम अंग्रेजी में करते हैं और भाषाई विविधता वाले देश में यह एक बड़ी चुनौती है। CJI ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) इस चुनौती से निपटने में बड़ी भूमिका निभाता है। सीजेआइ चंद्रचूड़ चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी की ओर से देश की अदालतों में प्रौद्योगिकी के परिदृश्य पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।
CJI ने कहा कि AI और तकनीकी के इस्तेमाल से बदलाव आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट के AI युक्त अनुवाद सॉफ्टवेयर 'सुवास' की मदद से निर्णयों का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया जा रहा है। खुलापन स्पष्टता लाता है। अदालतों में वर्चुअल सुनवाई अब एक मानक प्रथा बन गई है। इस बदलाव ने वादियों, वकीलों और आम जनता के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाया है। वकील अब देश भर की अदालतों में पेश हो सकते हैं, जिससे नागरिकों को कानूनी सलाह सुलभ है। वादी भी अपनी सुनवाई में लॉग इन कर कार्यवाही को सीधे देख सकते हैं। CJI ने कहा कि AI के जरिये कोर्ट की कार्यवाहियों की ट्रांस्क्रिप्ट्स तैयार होने से आई पारदर्शिता ने न्यायशास्त्र की गुणवत्ता और जवाबदेही बढ़ाई है। इन ट्रांस्क्रिप्ट्स से भविष्य में कानून के विद्यार्थियों और वकीलों के लिए निर्णयों के परिप्रेक्ष्य समझने में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि वकीलों का सामान्य काम AI से पूरा होने पर उन्हें केस स्टडी, रणनीति और बेहतर तर्कशक्ति के लिए ज्यादा समय मिलेगा।
सीजेआइ ने हर न्यायालय में ई-सेवा (E-Service) केन्द्र स्थापित करने की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि ई-सेवा केंद्रों में अदालती फैसले-आदेश उपलब्ध हों और ई-फाइलिंग में भी मदद मिले। हमें आम लोगाें के प्रति समानता और समर्थन को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि प्रौद्योगिकी के मामले में कोई भी पीछे न छूटे।