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‘1947 से कश्मीर-दिल्ली के बीच भरोसे की कमी, इसे दूर करना होगा’, फारूक अब्दुल्ला का बड़ा बयान

Farooq Abdullah Reactions: फारूक अब्दुल्ला ने कहा है- कश्मीर और दिल्ली के बीच 1947 से चला आ रहा अविश्वास खत्म होना चाहिए। उन्होंने राज्य का दर्जा, शांति और इंडिया गठबंधन पर भी खुलकर बयान दिया।

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May 02, 2026
फारूक अब्दुल्ला। (फोटो- ANI)

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ फारूक अब्दुल्ला ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने खुलकर कहा है कि इस देश की सबसे बड़ी त्रासदी कश्मीर और दिल्ली के बीच गहरे अविश्वास की है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि 1947 से अब तक कश्मीर और दिल्ली के बीच भरोसे की कमी है और इसे खत्म किए बिना आगे बढ़ना मुश्किल है। फारूक ने एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही।

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'कश्मीर के लोग शांति चाहते हैं'

फारूक ने आगे कहा- जब तक कश्मीर और दिल्ली के बीच यह अविश्वास खत्म नहीं होगा, हम आगे नहीं बढ़ पाएंगे। उन्होंने कहा कि कश्मीरी लोग हिंसा से थक चुके हैं।

उन्होंने पाकिस्तान से भी अपील की कि अब काफी हो गया, हिंसा का चक्र बंद करो। दोनों देशों को सम्मान और शांति के रास्ते पर चलना चाहिए।

उन्होंने जोर दिया कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और यहां के लोग शांति से रहना चाहते हैं। लेकिन लंबे समय से चला आ रहा अविश्वास दोनों तरफ की प्रगति में बाधा बन रहा है।

राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग

इस बीच, फारूक अब्दुल्ला ने इंडिया गठबंधन पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस मिलने की मांग पर इंडिया गठबंधन ठोस समर्थन नहीं दे रहा है। कांग्रेस समेत अन्य पार्टियां इस मुद्दे पर ज्यादा जोर नहीं दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि गठबंधन को सिर्फ चुनावों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे और मजबूत करने के लिए नियमित बैठकें होनी चाहिए ताकि जम्मू-कश्मीर के मुद्दों पर ठोस आवाज उठ सके।

दिल्ली का रवैया बदलना जरूरी

फारूक ने जोर देकर कहा कि दिल्ली को कश्मीर के लोगों पर भरोसा करना होगा। उन्होंने याद दिलाया कि इतिहास में कई बार प्रयास हुए लेकिन अविश्वास की दीवार अभी भी खड़ी है।

उन्होंने कहा कि कश्मीर समस्या सिर्फ सुरक्षा की नहीं है। यहां शिक्षा, रोजगार, भाषा और संस्कृति के मुद्दे भी हैं। दिल्ली अगर इन पर ध्यान दे तो हालात सुधर सकते हैं।

युवा पीढ़ी को उम्मीद चाहिए

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर की युवा पीढ़ी बेरोजगारी और अनिश्चितता से जूझ रही है। अगर अविश्वास खत्म हुआ तो विकास के नए रास्ते खुलेंगे। पर्यटन, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में कश्मीर आगे बढ़ सकता है।

उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि स्थानीय नेताओं और लोगों की भावनाओं को समझा जाए। सिर्फ बल प्रयोग से समस्या हल नहीं होगी, बातचीत और विश्वास ही रास्ता है।

विपक्ष की भूमिका

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि विपक्षी दलों को जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। अगर गठबंधन मजबूत हुआ तो केंद्र पर दबाव बनेगा और राज्य का दर्जा जल्द बहाल हो सकता है। उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि दोनों तरफ नफरत फैलाने के बजाय सकारात्मक खबरें दिखाएं ताकि माहौल बेहतर बने।

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