पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की PoK में अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी। इस पर उसके पिता ने जो कहा....
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में अज्ञात बंदूकधारियों ने कुख्यात आतंकी हमजा बुरहान (Pulwama Attack Mastermind Hamza Burhan) की गोली मारकर हत्या कर दी। हमजा बुरहान पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड था। इस हमले में 40 से अधिक CRPF के जवान शहीद हुए थे। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने 2022 में उसे वांटेड और आतंकवादी घोषित कर दिया था। एजेंसियां कहती हैं कि वह लंबे समय से आतंकी भर्ती नेटवर्क और अन्य गतिविधियों में सक्रिय था। हमजा की मौत पर उसके परिजनों का बयान आया है।
हमजा बुरहान कश्मीर के पुलवामा के इलाके का रहने वाला था। वह मेडिकल पढ़ाई की बात कहकर पाकिस्तान गया था, लेकिन वहां जाकर वह आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गया। हमजा की मौते के बाद उसके पिता ने कहा कि हमजा पढ़ाई के नाम पर पाकिस्तान गया था। MBBS करने की बात कही थी, लेकिन वहां जाकर उसने आतंकवाद का रास्ता चुन लिया। हमने उसकी वजह से बहुत दुख सहे। अच्छा हुआ कि वह मारा गया।
हमजा बुरहान की बड़ी बहन ने कहा कि भाई की मौत की खबर सबसे पहले फेसबुक से मिली। उन्होंने कहा कि जब मैं फेसबुक स्क्रॉल कर रही थी, उसी दौरान पढ़ा कि हमजा मारा गया। उन्होंने कहा, 'पहले मैं कुछ समझ नहीं पाई, हमें कोई पक्की जानकारी नहीं थी। बाद में फोन पर कंफर्म हुआ। हमें अभी भी इस बात पर यकीन नहीं हो रहा कि वह अब इस दुनिया में नहीं है।' उन्होंने बताया कि हमजा अक्सर परिवार को फोन करके कहता था कि वह पाकिस्तान में पढ़ाई कर रहा है। लेकिन बाद में पता चला कि वह गलत रास्ते पर चला गया। परिवार को यह भी नहीं मालूम था कि वह किन गतिविधियों में शामिल हो गया है।
हमजा बुरहान का असली नाम अर्जुमंद गुलजार डार था। वह जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के खरबतपोरा, रत्नीपोरा गांव का रहने वाला था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, 14 फरवरी 2019 को पुलवामा के लेथपोरा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए आत्मघाती हमले की साजिश तैयार करने में उसने अहम भूमिका निभाई थी। इस हमले में 40 जवान शहीद हुए थे। बताया जाता है कि हमजा ने आतंकियों को इलाके की पूरी जानकारी दी थी और राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर सर्विस रोड के जरिए विस्फोटकों से भरी गाड़ी को काफिले तक पहुंचाने का सुझाव भी उसी ने दिया था।
पुलवामा हमले के बाद हमजा वैध दस्तावेजों के जरिए पाकिस्तान चला गया था। वहां पीओके में उसने आतंकी संगठन अल-बद्र जॉइन किया और बाद में उसे कमांडर बना दिया गया। सूत्रों के अनुसार, उसने कश्मीर के कई युवाओं को आतंकी संगठनों में शामिल करवाया और उन्हें प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भेजने का काम भी किया। मुजफ्फराबाद में रहते हुए उसने खुद को एक शिक्षक के रूप में पेश किया था, ताकि उसकी असली गतिविधियों पर किसी को शक न हो।