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विजय कैबिनेट का विस्तार: दो ब्राह्मणों और आठ दलित मंत्रियों के साथ संतुलन बैठाने की पहल

TVK cabinet expansion: मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने 23 नए मंत्रियों को शामिल कर कैबिनेट का बड़ा विस्तार किया। दलितों और ब्राह्मणों को प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की गई, जबकि कांग्रेस को 59 साल बाद सत्ता में हिस्सेदारी मिली।

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Tamil Nadu Cabinet Expansion

Chennai: Governor R.V. Arlekar greets minister Rajesh Kumar during the Cabinet swearing-in ceremony in the presence of CM C. Joseph Vijay. (Photo - IANS)

Vijay cabinet expansion: मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने गुरुवार को अपने मंत्रिपरिषद का बड़ा विस्तार करते हुए 23 नए मंत्रियों को शामिल किया। इनमें 21 टीवीके और दो कांग्रेस विधायक हैं। इसके साथ ही कैबिनेट की संख्या बढ़कर 33 हो गई है। अधिकतम 35 सदस्यों वाली कैबिनेट में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आइयूएमएल) के अलावा वीसीके भी शामिल होगी। इससे टीवीके प्रमुख विजय ने स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता में एआइएडीएमके के किसी भी बागी गुट को शामिल करने की गुंजाइश नहीं है।

राज्यपाल आरवी अर्लेकर ने लोक भवन में आयोजित समारोह में सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। कांग्रेस के एस राजेश कुमार और पी विश्वनाथन ने मंत्री पद की शपथ ली। यह 1967 के बाद पहला मौका था जब कांग्रेस को सत्ता में साझेदारी मिली है। विजय ने कैबिनेट में सामाजिक संतुलन साधते हुए सात दलित मंत्रियों को शामिल कर नया रिकॉर्ड बनाया है। इनमें 27 वर्षीय एस कमली, डी. लोकेश तमिलसेल्वन, गांधीराज, तेनरासु और कांग्रेस के विश्वनाथन शामिल हैं। जब वीसीके के वन्नी अरसु कैबिनेट में शामिल होंगे तो यह संख्या आठ हो जाएगी। शिक्षा मंत्रालय भी दलित नेतृत्व के हाथों में होगा। स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन और उच्च शिक्षा विभाग संभालने वाले विश्वनाथन दोनों दलित हैं।
ब्राह्मण प्रतिनिधित्व और चेन्नई का दबदबा

कई दशकों में पहली बार कैबिनेट में दो ब्राह्मण मंत्री शामिल हुए हैं। खाद्य मंत्री पी. वेंकटरमणन के बाद हिन्दू धर्म और धार्मिक बंदोबस्ती विभाग के मंत्री के रूप में एस रमेश ने शपथ ली। वे श्रीरंगम से विधायक हैं। कुल 33 मंत्रियों में से सात चेन्नई से हैं, जहां टीवीके ने 16 में से 14 सीटें जीती थीं। यह विजय की रणनीति को दर्शाता है कि उन्होंने शहरी और जातीय संतुलन साधने की कोशिश की है।

"हॉर्स-ट्रेडिंग" आरोपों से बचने का किया उपाय

विजय ने कैबिनेट विस्तार में AIADMK के बागी नेताओं को शामिल न करने का फैसला किया। पार्टी नेतृत्व को आशंका थी कि इन नेताओं को शामिल करने से टीवीके की 'भ्रष्टाचार-विरोधी' छवि धूमिल होगी। पूर्व मंत्री एसपी वेलुमणि और सी विजयभास्कर के खिलाफ भ्रष्टाचार मामलों ने इस संभावना को और कमजोर किया। TVK को लगा कि इन नेताओं को शामिल करने से मतदाताओं में गलत संदेश जाएगा और विपक्षी दलों के 'हॉर्स-ट्रेडिंग' आरोपों को बल मिलेगा। यही कारण है कि मुख्यमंत्री विजय ने AIADMK बागियों को बाहर रखने का निर्णय लिया।

इस विस्तार से TVK ने कांग्रेस को सत्ता में हिस्सेदारी देकर ऐतिहासिक संतुलन बनाया है और दलितों व ब्राह्मणों को प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक विविधता को मजबूत किया है। साथ ही AIADMK बागियों को बाहर रखकर पार्टी ने अपनी भ्रष्टाचार-विरोधी और भाजपा-विरोधी छवि को सुरक्षित रखा है।