
Ahmedabad Serial Blasts: जयपुर को 13 मई 2008 को दहलाने के बाद अहमदाबाद में 26 जुलाई 2008 मनहूस दिन साबित हुआ। आतंकियों ने महज 71 मिनट में शहर में 21 स्थानों पर रखे साइकिल बमों से सिलसिलेवार धमाके किए। अहमदाबाद जो गुजरात और पश्चिमी भारत के एक बड़े भाग का सांस्कृतिक और वाणिज्यिक केंद्र है इन धमाकों से पूरा थर्रा गया। बम धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई और 200 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए। मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार को स्पेशल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए 49 गुनाहगारों को सजा सुनाई है।
अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में गुजरात हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के फैसले पर मुहर लगा दी है। मंगलवार को हाईकोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत के फैसले में बदलाव करने से इनकार करते हुए स्पेशल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। फरवरी 2022 में स्पेशल कोर्ट ने 38 दोषियों को फांसी की सजा और 11 अन्य लोगों को आजीवन कैद की सजा दी थी। हाईकोर्ट ने सीरियल ब्लास्ट मामले में 56 मृतक के परिजनों को 10 लाख, 200 से अधिक घायलों को 1 लाख मुआवजा देने का आदेश भी दिए।
आतंकियों ने बमों को साइकिलों पर रखे टिफिन डिब्बों में फिट किया था जो ठीक 13 मई 2008 के जयपुर बम धमाकों का पैटर्न था। कई धमाकों में अहमदाबाद नगर परिवहन सेवा (एएमटीएस ) की सिटी बस सेवा को निशाना बनाया गया। सीरियल ब्लास्ट में करीब 40 मिनट बाद दो अस्पतालों के परिसर में दो बड़े ब्लास्ट हुए। अस्पतालों में हुए धमाकों में से एक उस समय हुआ जब शुरुआती धमाकों की श्रृंखला के घायल पीड़ितों को वहां भर्ती कराया जा रहा था। अगले दिन हटकेश्वर क्षेत्र में एक और बम बरामद किया गया और उसे निष्क्रिय कर दिया गया। पुलिस ने मणिनगर से भी 2 जिंदा बम बरामद किए थे।
आतंकियों ने अहमदाबाद सिविल अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर, खादिया,रायपुर,सारंगपुर,एलजी अस्पताल, मणिनगर, हटकेश्वर सर्कल,बापुनगर,ठक्करबापा नगर, जवाहर चौक, गोविंदवाड़ी,इसानपुर, नारोल और सरखेज में रैकी कर बम धमाकों के लिए स्थान चिन्हित किए। उसके बाद सीरियल ब्लास्ट की योजना को अंजाम दिया गया।
अहमदाबाद बम धमाकों के एक दिन बाद सूरत शहर को भी धमाकों से दहलाने की आतंकियों की योजना थी। लेकिन गुजरात पुलिस ने वक्त रहते इस योजना को नाकाम कर दिया था। गुजरात पुलिस ने सूरत शहर से भी कई जिंदा बम बरामद किए गए थे जो तकनीकी खराबी के कारण फट नहीं पाए। पुलिस ने विस्फोटकों से भरी दो कारों भी जब्त की थी।
अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में बमों को साइकिलों पर रखे टिफिन बॉक्स के अंदर छिपाकर प्लांट कर मुख्य रूप से भीड़भाड़ वाले बाजारों, सार्वजनिक बसों और यहां तक कि सिविल अस्पताल को निशाना बनाया। आतंकियों का इरादा कि ज्यादा से ज्यादा मानवीय नुकसान करना था। बम ब्लास्ट की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (IM) ने ली थी, जो प्रतिबंधित संगठन 'सिमी' (SIMI) से ही जुड़ा एक धड़ा था। जांच में एजेंसियों ने दावा किया था कि आतंकियों ने साल 2002 में हुए गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए इस पूरी साजिश को रचा था।