राष्ट्रीय

कांग्रेस के पूर्व सीएम की वो बात, जो खरगे और राहुल गांधी को चुभ गई, भरी सभा में दे डाली कड़ी हिदायत

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चरणजीत चन्नी के दलितों की अनदेखी वाले बयान पर कांग्रेस आलाकमान ने सख्त रुख अपनाया। तीन घंटे की बैठक में पंजाब नेताओं को फटकार लगाई और पूरे देश में अनर्गल बयानबाजी से बचने का निर्देश दिया। पंजाब में पार्टी संगठनात्मक चुनौतियों और आंतरिक कलह से जूझ रही है।

2 min read
Jan 24, 2026
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे। (Photo-ANI)

तमिलनाडु, असम, केरल, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य चरणजीत चन्नी के दलितों की अनदेखी का बयान के बाद कांग्रेस आलाकमान ने सख्ती दिखाई है।

आलाकमान ने तीन घंटे की बैठक में चन्नी समेत पंजाब के नेताओं को खरी खरी सुनाई। साथ ही देशभर के नेताओं को संदेश दिया कि अनर्गल बयानबाजी से दूर रहें। दरअसल, पंजाब लंबे समय से कांग्रेस के लिए संगठनात्मक चुनौती बना रहा है।

ये भी पढ़ें

Rajasthan Politics: राजस्थान के ये 4 नेता जो कांग्रेस से भाजपा में आए, लेकिन उन्हें लगा जोरदार झटका

मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर खींचतान, नेताओं के बीच सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप और सोशल मीडिया पर बयानबाजी ने पार्टी को पहले भी राजनीतिक नुकसान पहुंचाया है।

ऐसे में आलाकमान ने पूर्व सीएम चन्नी के बयान को गंभीर माना जिसमें उन्होंने पार्टी की एक बैठक में कहा कि पंजाब में यदि दलित आबादी 35 से 38 फीसदी है तो हमें प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिल रहा।

उन्होंने प्रदेशाध्यक्ष, विधायक दल नेता और महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद पर उच्च जाति के लोगों की नियुक्ति पर ऐतराज जताते हुए कहा था कि दलित कहां जाएंगे।

तीन घंटे चली बैठक

कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि पंजाब के नेताओं के साथ तीन घंटे चली बैठक में आलाकमान ने चन्नी को उनके बयान को लेकर फटकार पिलाई।

बैठक में अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और महासचिव केसी वेणुगोपाल मौजूद रहे। चन्नी को याद दिलाया गया कि ऊंची जाति के नेताओं को दरकिनार कर उन्हें सीएम बनाया गया था और आज भी वह कार्यसमिति सदस्य हैं।

पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष दलित समाज से हैं, जिन्हें आलाकमान ने साफ कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जो दलित समाज से आते हैं। खरगे ने हिदायत दी कि भविष्य में ऐसे बयानों से बचें, नहीं तो अनुशासनहीनता मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।

क्यों जरूरी थी सख्ती?

पार्टी नेतृत्व को यह अहसास है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में अनुशासनहीनता और आंतरिक असंतोष कमजोरी का कारण बन सकता है।

राज्यों में अलग-अलग सत्ता केंद्र बनाने की कोशिशें, मीडिया में बयानबाजी से दबाव की राजनीति और सोशल मीडिया पर ‘पार्टी लाइन’ से हटकर बयान पार्टी की रणनीति को कमजोर कर सकते हैं। इसलिए पार्टी सख्ती बरतेगी।

सामूहिक नेतृत्व में चुनाव

पंजाब के प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल का यह कहना कि कांग्रेस सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी और खरगे व राहुल पार्टी के चेहरे होंगे।

Also Read
View All

अगली खबर