Kete Extension coal block: एफएसी बैठक से पहले पीएमओ और समिति के सदस्यों को भेजे दस्तावेज, ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहर रामगढ़ और जंगल बचाने की मांग
अंबिकापुर। हसदेव अरण्य क्षेत्र के केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक (Kete Extension coal block) को वन स्वीकृति दिए जाने के प्रस्ताव पर शुक्रवार को केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की फॉरेस्ट एडवायजरी कमेटी (एफएसी) की बैठक में विचार होना है। बैठक से पहले प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने समिति के सदस्यों से फोन पर चर्चा कर ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से दस्तावेज भेजते हुए इस परियोजना को मंजूरी नहीं देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक की अनुमति से रामगढ़ की पहाडिय़ों को खतरा है।
टीएस सिंह देव ने कहा है कि राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित इस कोल ब्लॉक में अदाणी एमडीओ के रूप में कार्य कर रही है। प्रस्तावित खदान (Kete Extension coal block) के लिए करीब 1742 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग किया जाएगा, जिससे लगभग 7 लाख पेड़ों की कटाई होगी।
सिंह देव ने दावा किया है कि इससे हसदेव अरण्य के घने जंगल, जैव विविधता, हसदेव नदी और बांगो जलाशय पर गंभीर असर पड़ेगा। सिंहदेव ने एफएसी का ध्यान ऐतिहासिक रामगढ़ पहाडिय़ों की ओर भी आकर्षित कराया है। उनका कहना है कि खनन गतिविधियों के कारण पहाडिय़ों में दरारें आने लगी हैं।
यह क्षेत्र भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षित स्मारकों में शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट में रामगढ़ पहाडिय़ों की दूरी गलत तरीके से 10 किलोमीटर से अधिक बताई गई है, जबकि वास्तविक दूरी लगभग 8 किलोमीटर है। सिंहदेव ने कहा कि यदि खनन का विस्तार (Kete Extension coal block) हुआ तो प्राचीन गुफाओं और मंदिरों को नुकसान पहुंच सकता है।
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) देहरादून ने वर्ष 2021 की रिपोर्ट में पीईकेबी-आई को छोडक़र बाकी नई खदानों के लिए केते एक्सटेंशन (Kete Extension coal block) क्षेत्र को ‘नो गो एरिया’ घोषित करने की सिफारिश की थी। वहीं आईसीएफआरई की रिपोर्ट में भी चोरनाई वाटरशेड क्षेत्र में खनन पर रोक लगाने का सुझाव दिया गया था। बताया गया कि केते एक्सटेंशन का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इसी वाटरशेड क्षेत्र में आता है।
सिंहदेव ने कहा कि यह इलाका (Kete Extension coal block) लेमरू हाथी अभ्यारण्य के बफर जोन में आता है। वर्ष 2014 के बाद से क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि हुई है। ऐसे में नए खनन क्षेत्र की अनुमति से स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित उस सर्वसम्मत प्रस्ताव का भी उल्लेख किया, जिसमें हसदेव अरण्य क्षेत्र में नई कोयला खदानों (Kete Extension coal block) का विरोध किया गया था।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में राज्य वन विभाग ने भी शपथ पत्र देकर कहा है कि वर्तमान पीईकेबी खदान में उपलब्ध कोयला भंडार अगले करीब 20 वर्षों तक जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त है, इसलिए नए खनन क्षेत्र की आवश्यकता नहीं है। सिंहदेव ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भी सभी दस्तावेज भेजते हुए रामगढ़ क्षेत्र के संरक्षण और संवर्धन के लिए हस्तक्षेप की मांग की है।