डिजिटल इंडिया से एआइ इंडिया: एआइ समिट में जारी 'इंडियाज एआइ इम्पैक्ट स्टार्टअप्स' रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय एआइ स्टार्टअप्स अब 'सुपर-यूटिलिटी' मॉडल पर काम कर रहे हैं।
डिजिटल इंडिया से एआइ इंडिया: भारत अब दुनिया का 'एआइ एक्सपोर्ट हब' बन रहा है। एआइ समिट में जारी 'इंडियाज एआइ इम्पैक्ट स्टार्टअप्स' रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय एआइ स्टार्टअप्स अब 'सुपर-यूटिलिटी' मॉडल पर काम कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के लगभग आधे 50% स्टार्टअप्स सीधे तौर पर आम आदमी की बुनियादी जरूरतों- हेल्थ-टेक, एड-टेक और एग्री-टेक में केंद्रित हैं।
क्योर एआई: एक्स-रे और सीटी स्कैन का विश्लेषण कर फेफड़ों के कैंसर और टीबी की शुरुआती पहचान।
निरामई : थर्मल इमेजिंग द्वारा बिना छुए, दर्द रहित और सस्ती ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग।
हेल्थप्लिक्स : डॉक्टरों के लिए एआई-आधारित डिजिटल नुस्खे, जिससे इलाज प्रक्रिया में तेजी।
देहात : 14 लाख से अधिक किसानों को फसल, खाद और बाजार की व्यक्तिगत सलाह।
क्रॉपिन: सैटेलाइट इमेजिंग से उपज का पूर्वानुमान और फसल की सेहत की निगरानी।
फसल : आईओटी सेंसर के जरिए सिंचाई और कीटनाशकों के सटीक उपयोग की सलाह व पानी की बचत।
कॉन्वेजीनियस : 'स्विफ्टचैट' बॉट्स के जरिए करोड़ों छात्रों तक क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा।
अधिविहान : ग्रामीण छात्रों के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में ट्यूटरिंग और शंका समाधान।
अदालत एआइ: अदालतों में रियल-टाइम स्टेनोग्राफर की तरह काम कर केस सुलझाने का समय कम करना।
कोरोवर-ई-सेवक : कई भारतीय भाषाओं में सरकारी सेवाओं और शिकायतों के प्रबंधन की सुविधा।
स्थानीय भाषाएं: 'सर्वम एआई' और 'सॉकेट एआई' विशेष रूप से भारतीय भाषाओं के लिए एआई मॉडल बना रहे हैं।
सीधी पहुंच: 'वाइसा' (मानसिक स्वास्थ्य) और 'खुशी बेबी' (स्वास्थ्य मार्गदर्शन) व्हाट्सएप के जरिए सीधे लोगों तक पहुंच रहे हैं।
वैश्विक मिसाल: भारत के ये कम लागत वाले समाधान दुनिया (विशेषकर विकासशील देशों) के लिए मॉडल बन रहे हैं।
इस विशेष सत्र में लॉन्च हुई रिपोर्ट में बुनियादी क्षेत्रों में बदलाव लाने वाले 110 से अधिक स्टार्टअप्स और गैर-लाभकारी संस्थाओं को शामिल किया गया है। लॉन्च के दौरान आइटी मंत्रालय के निदेशक श्री के. मोहम्मद वाई. सफीरुल्ला और अन्य अधिकारियों ने बताया कि ये कंपनियां एआई के 'सुपर-यूटिलिटी' मॉडल से कैसे 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के मंत्र को साकार कर रही हैं।