
Seraikela police station case: सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया थाना परिसर में 20 वर्षीय महिला के साथ कथित तौर पर सामुहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। इस मामले में सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने 15 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। आरोपियों के खिलाफ जांच बिठा दी है। हालांकि, इस घटना के बाद विपक्ष ने भी सरकार को कघटरे में खड़ा किया है। अब मामले पर सत्ताधारी दल की तरफ से प्रतिक्रिया भी आई है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेता मनोज पांडेय ने सोमवार को कहा कि गम्हरिया थाना परिसर के भीतर एक महिला से कथित दुष्कर्म के मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि आरोपी पुलिसकर्मियों का निलंबन और गिरफ्तारी इस बात का सबूत है कि गलत काम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
न्यूज एजेंसी ANI संग बातचीत में कहा कि यह झारखंड की धरती है। यहां ऐसी तेज और निर्णायक कार्रवाई होती है कि अपराधी दोबारा अपराध करने की हिम्मत नहीं कर सकता है। अगर कुछ गलत होगा तो वह छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की गई, उन्हें निलंबित किया गया और गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान गम्हरिया थाने में तैनात वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। सरायकेला के अनुमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने आगे की जांच की। इसके बाद थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर मनोज कुमार साहू और कांस्टेबल संतोष कुमार राय को भी गिरफ्तार किया गया, जिन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है। मामले के अन्य पहलुओं की जांच जारी है।
सरायकेला के एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज ने बताया कि महिला ने 31 अक्टूबर को लिखित शिकायत दी थी, जिसमें उसने थाना परिसर के भीतर दुष्कर्म का आरोप लगाया। SDPO अनुभव ने बताया कि मामले को तुरंत संज्ञान में लेते हुए तत्काल टीम बनाई गई, आरोपियों को पकड़ा गया और अब वे न्यायिक हिरासत में हैं। सभी जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का चरणबद्ध तरीके से पालन किया गया है। मामले की जांच जारी है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी बताया कि चार आरोपियों को निलंबित किया गया है और आरोप एक वायरलेस ऑपरेटर पर लगाए गए हैं।
एसटी मोर्चा (जेएलकेएम) के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रेम मार्डी ने कहा कि मेरा सवाल सीधे झारखंड सरकार से है। यहां डीजीपी खुद एक महिला हैं, फिर भी पुलिस बल की कमान एक महिला के हाथ में होने के बावजूद थाने के भीतर महिला के साथ ऐसी हैवानियत कैसे हो सकती है? ऐसा लगता है कि सीसीटीवी कवरेज या तो अपर्याप्त है या है ही नहीं। महिला पुलिसकर्मियों की गैरमौजूदगी झारखंड में पुलिस प्रशासन के पूरी तरह ध्वस्त होने का संकेत है। यहां महिलाएं सुरक्षित महसूस ही नहीं करतीं।