
Global Warming: अपनी हवेलियों, चौड़ी सड़कों और गुलाबी रंग की इमारतों के लिए पहचाना जाने वाला जयपुर हो या झीलों की नगरी कहे जाने वाला भोपाल, अब एक नई अनचाही पहचान से भी जूझ रहे हैं, 'भीषण गर्मी।' मई-जून की दोपहरियों में जब सड़कें तवे की तरह तपने लगती हैं, तब सवाल उठता है कि क्या भविष्य और ज्यादा गर्म होने वाला है? जर्नल 'सस्टेनेबल सिटीज एंड सोसाइटी' में प्रकाशित यूनिवर्सिटी आफ ऑक्सफोर्ड के दुनिया के 205 बड़े शहरों का अध्ययन करने वाले शोध में जयपुर और भोपाल जैसे शहरों को उन शीर्ष 50 शहरों में शामिल किया गया है, जहां बढ़ते वैश्विक तापमान का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। वहीं, अहमदाबाद दुनिया का दूसरा, नागपुर चौथा और मदुरै सातवां सबसे अधिक जोखिम वाला शहर पाया गया। शीर्ष 50 की सूची में भारत के 14 शहर शामिल है।
गर्मी का खतरा केवल पारे को 45 डिग्री पार जाने से सीमित करने पर नहीं है। शोधकर्ताओं ने तीन पहलुओं पर शहरों का आकलन किया, गर्मी का सीधा असर, लोगों की संवेदनशीलता और उससे निपटने की क्षमता। केवल गर्म शहर ही नहीं, बल्कि वे शहर भी जोखिम में हैं जहां हरित क्षेत्र कम हैं, आबादी घनी है और सभी लोगों के पास पर्याप्त शीतलन सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
शहरी क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी अब केवल मौसमी समस्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का बड़ा संकट है। विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया पहले ही औद्योगिक युग से लगभग 1.4 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म हो चुकी है। यदि आने वाले वर्षों में शक्तिशाली एल नीनो प्रभाव सक्रिय हुआ तो दक्षिण एशिया में गर्मी की लहरें और अधिक तेज हो सकती हैं।
जयपुर, अहमदाबाद, भोपाल जैसे शहरों की आबादी लगातार बढ़ रही है। नई कॉलोनियां, कंक्रीट के विस्तार और घटते हरित क्षेत्र शहर में ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव को बढ़ा रहे हैं। दिन में गर्म होने वाली इमारतें और सड़कें रात में भी गर्मी छोड़ती रहती हैं। वहीं, पर्यटन और व्यापार का प्रमुख केंद्र होने के कारण भी एसी बढ़ रहे हैं जो और अधिक गर्मी की वजह है।
शोधकर्ताओं के अनुसार किसी शहर का जोखिम केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वहां कितनी गर्मी पड़ती है। यह भी महत्वपूर्ण है कि गर्मी को रोकने या बचाव के कितने संसाधन उपलब्ध हैं। विशेषज्ञ अधिक पेड़ लगाने, छतों को ठंडा रखने वाली तकनीकों, पारंपरिक वास्तुकला, बेहतर वेंटिलेशन व सार्वजनिक शीतलन केंद्रों जैसी रणनीतियों पर जोर दे रहे हैं।
सबसे अधिक जोखिम वाले 95 प्रतिशत से ज्यादा शहर दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया तथा उप-सहारा अफ्रीका में स्थित हैं। भारत, पाकिस्तान, नाइजीरिया और घाना ऐसे देशों में शामिल हैं जहां बड़ी संख्या में शहर उच्च जोखिम श्रेणी में आते हैं।
| वैश्विक रैंक | शहर | देश |
|---|---|---|
| 1 | अल बशरा | इराक |
| 2 | अहमदाबाद | भारत |
| 3 | बमाको | माली |
| 4 | नागपुर | भारत |
| 5 | क्वेजोन सिटी | फिलीपींस |
| 6 | बगदाद | इराक |
| 7 | मदुरै | भारत |
| 8 | फैसलाबाद | पाकिस्तान |
| 9 | लागोस | नाइजीरिया |
| 10 | हैदराबाद | पाकिस्तान |
| वैश्विक रैंक | शहर |
|---|---|
| 2 | अहमदाबाद |
| 4 | नागपुर |
| 7 | मदुरै |
| 15 | भोपाल |
| 20 | कानपुर |
| 23 | पुणे |
| 25 | पटना |
| 31 | हैदराबाद |
| 33 | बेंगलूरु |
| 35 | कोलकाता |
| 36 | जयपुर |
| 41 | लखनऊ |
| 49 | मुंबई |
| 50 | चेन्नई |