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CJP Protest Latest Update: जंतर-मंतर विरोध पर नीट पास कर चुके स्टूडेंट्स की दो टूक, कहा-आंदोलन अपनी दिशा खो चुका है

CJP Protest Latest Update: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर नीट पास छात्रों ने कहा कि वे पेपर लीक और निष्पक्ष परीक्षा की मांग का समर्थन करते हैं, लेकिन आंदोलन के राजनीतिक स्वरूप और हिंसक घटनाओं से सहमत नहीं हैं। छात्रों ने शिक्षा से जुड़े मुद्दों को राजनीति से दूर रखने की अपील की।
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भारत

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Harshul Mehra

Jul 22, 2026

neet qualified students react jantar mantar cjp protest row

जंतर-मंतर प्रदर्शन का नीट पास छात्रों ने किया विरोध। फोटो सोर्स- वीडियो ग्रैब X (@DDNewsHindi)

CJP Protest Latest Update Delhi: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे CJP के विरोध-प्रदर्शन को लेकर अब उन छात्रों की भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं, जिन्होंने हाल ही में नीट परीक्षा में सफलता हासिल की है। पटना के कई सफल अभ्यर्थियों ने कहा कि वे पेपर लीक और निष्पक्ष परीक्षा की मांग का समर्थन करते हैं, लेकिन आंदोलन के राजनीतिक स्वरूप और हिंसक घटनाओं से खुद को अलग रखते हैं। उनका कहना है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।

'शुरुआत सही थी, लेकिन अब आंदोलन का उद्देश्य बदल गया'

ऑल इंडिया रैंक (AIR) 3,926 हासिल करने वाली प्रिया भारती ने कहा कि जब आंदोलन शुरू हुआ था, तब इसका मकसद पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाना और निष्पक्ष परीक्षा की मांग करना था, इसलिए उन्हें यह सही लगा था, लेकिन अब इसमें राजनीतिक और धार्मिक मुद्दे जुड़ गए हैं, जिससे आंदोलन अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है।

उन्होंने कहा कि पेपर लीक के बाद छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोबारा परीक्षा की तैयारी थी। ऐसे समय में उन्होंने विरोध-प्रदर्शन के बजाय अपने करियर को प्राथमिकता दी और री-नीट की तैयारी में जुट गईं।

'प्रदर्शन से ज्यादा जरूरी था भविष्य बचाना'

प्रिया ने बताया कि दोबारा परीक्षा होना लगभग तय था, इसलिए उन्हें लगा कि आंदोलन में शामिल होने के बजाय तैयारी करना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक बार तैयारी का लय टूट जाए तो उसे दोबारा हासिल करना आसान नहीं होता, इसलिए उन्होंने पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रखा।

आरुषि बोलीं- छात्रों का आंदोलन राजनीतिक नहीं होना चाहिए

ऑल इंडिया रैंक 15,823 हासिल करने वाली आरुषि कुमारी ने कहा कि आंदोलन केवल छात्रों के हितों और पेपर लीक के विरोध तक सीमित रहता तो वह उसका समर्थन करतीं। लेकिन मौजूदा स्थिति में उन्हें यह आंदोलन राजनीतिक नजर आता है।

उन्होंने कहा कि पेपर लीक के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चिंता अपने भविष्य को सुरक्षित रखना था। इसलिए उन्होंने किसी भी प्रदर्शन में शामिल होने के बजाय परीक्षा की तैयारी जारी रखने का फैसला किया।

'राजनीतिक दलों की एंट्री से कमजोर पड़ा असली मुद्दा'

ऑल इंडिया रैंक 4,678 हासिल करने वाले अनुभव कृष्णा ने कहा कि शुरुआती दौर में यह आंदोलन पूरी तरह शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा की पारदर्शिता से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट में भी पेपर लीक को लेकर गंभीर सवाल उठे थे और उस समय आंदोलन उचित लग रहा था, लेकिन अब अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं की भागीदारी से आंदोलन का मूल उद्देश्य कमजोर होता दिखाई दे रहा है।

'हिंसा और लाठीचार्ज चिंता का विषय'

अनुभव ने कहा कि अब प्रदर्शन के दौरान हिंसा और लाठीचार्ज जैसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं, जो चिंता बढ़ाने वाली हैं। उनका मानना है कि शिक्षा से जुड़े किसी भी आंदोलन को शांतिपूर्ण रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि पेपर लीक के समय उन्होंने भी प्रदर्शन में शामिल होने के बजाय री-नीट की तैयारी को प्राथमिकता दी, क्योंकि उनके लिए करियर सबसे महत्वपूर्ण था।

अक्षय बोले- शिक्षा सुधार का समर्थन, राजनीति का नहीं

ऑल इंडिया रैंक 4,591 हासिल करने वाले अक्षय आनंद ने कहा कि वह पेपर लीक के खिलाफ हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग का समर्थन करते हैं। उनका मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने कहा कि आंदोलन के इर्द-गिर्द जिस तरह की राजनीतिक गतिविधियां हो रही हैं, उससे वह सहमत नहीं हैं।

'तैयारी छोड़कर आंदोलन में शामिल होना संभव नहीं था'

अक्षय ने बताया कि जब पेपर लीक का मामला सामने आया, तब वह पटना में रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। परीक्षा में केवल एक महीना बचा था, इसलिए उन्होंने प्रदर्शन में शामिल होने के बजाय अपनी पढ़ाई जारी रखी। उनका कहना है कि उस समय हर गंभीर छात्र का पहला लक्ष्य अपने भविष्य को सुरक्षित करना था और उन्होंने भी उसी सोच के साथ तैयारी पर पूरा ध्यान दिया।

छात्रों का संदेश- शिक्षा के मुद्दे को राजनीति से दूर रखा जाए

नीट में सफल इन छात्रों का कहना है कि पेपर लीक जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में सुधार बेहद जरूरी है, लेकिन शिक्षा से जुड़े आंदोलनों को राजनीतिक मंच बनने से बचाना चाहिए, ताकि उनका मूल उद्देश्य और छात्रों की वास्तविक समस्याएं केंद्र में बनी रहें।