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रसोई से राजनीति तक प्याज का प्रभाव, जानिए कैसे घर से लेकर चुनाव तक डालता है असर

Onion Price Hike: केंद्र सरकार की ओर से मुल्य स्थिरीकरण नीति के तहत प्याज की सरकारी खरीद में दरें बढ़ाने के बाद भी सरकार के बफर स्टॉक में अब तक उम्मीद से कम प्याज की खरीद हुई है।
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Jul 09, 2026
Onion Buffer Stock
photo- patrika

Onion Price Hike: केंद्र सरकार की ओर से मुल्य स्थिरीकरण नीति के तहत प्याज की सरकारी खरीद में दरें बढ़ाने के बाद भी सरकार के बफर स्टॉक में अब तक उम्मीद से कम प्याज की खरीद हुई है। प्याज रसोई का अहम हिस्सा होने के अलावा जनता की और उनकी भावनाओं तक को प्रभावित करता है वहीं देश की राजनीति तक को भी प्याज की किल्लत ने कई बार प्रभावित किया है। वहीं देश में अब भी प्याज की खुदरा कीमतें 30 रुपए प्रति किलोग्राम तक बनी हुई है।

केंद्र सरकार ने बीते 4 जुलाई को केंद्र सरकार ने प्याज किसानों को बेहतर दाम दिलाने के लिए बफर स्टॉक खरीद मूल्य 13% बढ़ाकर 2125 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है। बावजूद इसके बाजार में खुदरा कीमतें कम नहीं होने से लोगों को अब तक प्याज की खुदरा कीमतों में राहत नहीं मिल सकी है।

बफर स्टॉक में खरीद उम्मीद से कम

केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 2 लाख मीट्रिक टन प्याज का बफर स्टॉक तैयार करने का लक्ष्य रखा है। किसानों को बेहतर दाम दिलाने और बफर खरीद को गति देने के लिए सरकार ने इस साल 5वीं बार प्याज की सरकारी खरीद दरें बढ़ाई हैं। सूत्रों की मानें तो सरकारी मुल्य बढ़ाने के बाद भी अब तक सरकार का बफर स्टॉक 2000 टन तक ही पहुंच सका है।

सेब से भी महंगा बिका था प्याज

देश की राजनीति में प्याज की कीमतें पूर्व में भूचाल ला चुकी हैं। बीते कुछ वर्षों में प्याज की बेतहाशा बढ़ी कीमतों ने आमजन को प्रभावित किया और देश के कुछ शहरों में प्याज सेब से भी महंगा बिका। हालांकि केंद्र सरकार ने विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से लोगों को सस्ता प्याज उपलब्ध भी कराया।

देश की राजनीति में प्याज ला चुका है भूचाल

प्याज की बढ़ी कीमतों का देश की राजनीति में सरकारों को बनाने और गिराने तक में अहम योगदान साबित हुआ।
प्याज की आसमान छूती कीमतों से देश में कई बार सियासत गर्म हुई वहीं प्याज के कारण सत्ता परिवर्तन तक देखने को मिले।

प्याज ने बदली सरकारें

  • 1980 के आम चुनावों में प्याज देश में सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था। उस समय बढ़ती कीमतों के विरोध में इंदिरा गांधी ने गले में प्याज की माला पहनकर चुनाव प्रचार किया था। प्याज की बढ़ी कीमतों से तंग लोगों के वोट से कांग्रेस की भारी मतों से सत्ता में वापसी हुई।
  • दिल्ली में प्याज की आसमान छूती कीमतों के कारण 1998 में तत्कालीन भाजपा सरकार को भारी जन-आक्रोश का सामना करना पड़ा और पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा था।
  • राजस्थान की राजनीति में भी प्याज की आसमान छूती कीमतों से बड़े बदलाव नजर आए। राजस्थान में 1998 में भाजपा की सरकार रही और भैरोसिंह शेखावत मुख्यमंत्री थे। राजस्थान में बेमौसमी बारिश होने पर प्याज की किल्लत और आसमान छू रहे दामों से प्रदेश के लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। प्याज के मुद्दे पर सियासत गर्म होने के फलस्वरूप तत्कालीन भाजपा सरकार को सत्ता गंवानी पड़ी थी।

राजस्थान शीर्ष 5 सबसे बड़े उत्पादकों में शामिल

राजस्थान देश में शीर्ष प्याज उत्पादक राज्यों में शामिल है। यहां प्याज का वार्षिक उत्पादन लगभग 17.16 लाख मीट्रिक टन है। राजस्थान में सीकर जिला सबसे बड़ा प्याज उत्पादक है, जहां रबी सीजन में लगभग 7 से 7.5 लाख मीट्रिक टन प्याज का उत्पादन होता है। सीकर के प्याज को अपनी मिठास और 6 महीने की लंबी भंडारण क्षमता के लिए देश भर में शेखावाटी का मीठा प्याज या रसीदपुरा रेड के नाम से जाना जाता है। राजस्थान में सीकर के अलावा अलवर, झुंझुनू, जोधपुर, नागौर और जयपुर राज्य के प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्र हैं।

Updated on:
09 Jul 2026 04:05 pm
Published on:
09 Jul 2026 04:04 pm