पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में बताया कि भारत में हर साल 29 मिलियन टन कच्चा तेल निकाला जाता है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक इसे बढ़ाकर 35 मिलियन टन करने का है।
बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि भारत अपनी जरूरत का 88 फीसदी तेल दूसरे देशों से खरीदता है। यानी पेट्रोल पंप पर जो तेल आप डलवाते हैं उसका लगभग पूरा हिस्सा विदेश से आता है। लेकिन अब सरकार ने तय किया है कि 2030 तक यह तस्वीर बदलनी है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए बताया कि अभी देश में हर साल 29 मिलियन टन कच्चा तेल निकाला जाता है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक यह बढ़कर 35 मिलियन टन हो जाए।
यह लक्ष्य इसलिए जरूरी है क्योंकि देश में तेल की मांग लगातार बढ़ रही है। गाड़ियां बढ़ रही हैं, उद्योग बढ़ रहे हैं और शहर बड़े होते जा रहे हैं।
सरकार ने तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। समुद्र में करीब 10 लाख वर्ग किलोमीटर का वो इलाका जो दशकों से तेल खोज के लिए बंद था उसे खोल दिया गया है। इन इलाकों में तेल और गैस मिलने की संभावना है लेकिन पहले किसी को वहां जाने की इजाजत नहीं थी।
इसके अलावा सरकार जमीन पर और समुद्र में भूकंपीय सर्वेक्षण यानी सीस्मिक डेटा इकट्ठा करने पर करीब 7500 करोड़ रुपये खर्च कर रही है ताकि पता चल सके कि तेल कहां कहां दबा हुआ है।
सरकार सिर्फ जमीन से तेल निकालने पर ही नहीं बल्कि दूसरे विकल्पों पर भी काम कर रही है। CNG और PNG का नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है। पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का काम जारी है जिससे कच्चे तेल की जरूरत कम होती है। कंप्रेस्ड बायोगैस यानी CBG को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले दशकों में दुनिया में जितनी भी नई ऊर्जा की मांग बढ़ेगी उसमें से 20 से 30 फीसदी अकेले भारत की होगी।
अभी भारत हर दिन करीब 55 लाख बैरल तेल इस्तेमाल करता है। 2050 तक यह बढ़कर 85 से 105 लाख बैरल प्रतिदिन हो सकता है।
सवाल यह है कि क्या भारत उस मांग को अपने देश में निकाले तेल से पूरा कर पाएगा या विदेशों पर निर्भरता बनी रहेगी। 2030 का लक्ष्य उसी दिशा में पहला बड़ा कदम है।