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Hamid Ansari Controversy: हामिद अंसारी के बयान पर शाहनवाज हुसैन का पलटवार, बोले- भारत को लेकर गलतफहमी न फैलाएं

India Muslims: हामिद अंसारी की टिप्पणी पर सियासी प्रतिक्रिया थमने के बजाय और तेज हो गई है। शाहनवाज हुसैन ने सवाल उठाया कि भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर ऐसा नजरिया आखिर किस आधार पर बनाया जा रहा है।
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Hamid Ansari controversy
Hamid Ansari controversy : नेहरू के बयान से छिड़ी बहस, हामिद अंसारी पर शाहनवाज हुसैन ने उठाए बड़े सवाल (फोटो सोर्स: ANI)

Hamid Ansari Statement: नई दिल्ली में पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की टिप्पणी पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। ए.जी. नूरानी स्मृति व्याख्यान में अंसारी ने जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने कथन का हवाला देते हुए हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को भारत के सामने चुनौती के तौर पर पेश किया। इसके बाद भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अंसारी के सार्वजनिक जीवन और संवैधानिक पदों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को लेकर ऐसी धारणाएं भ्रम पैदा करती हैं और इस पर स्पष्टीकरण जरूरी है।

Hamid Ansari Controversy: क्या बोले शाहनवाज हुसैन?

भाजपा नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने अंसारी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश ने उन्हें लंबे सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दीं। हुसैन ने उनके राजनयिक करियर, विदेश सेवा और दो कार्यकाल तक उपराष्ट्रपति रहने का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व उपराष्ट्रपति को अब भी पूर्व संवैधानिक पदाधिकारियों को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं प्राप्त हैं।

हुसैन का मुख्य तर्क यह था कि भारत में मुस्लिम समुदाय की स्थिति को लेकर किसी तरह की व्यापक असुरक्षा की धारणा पेश करने से पहले देश के सामाजिक और संवैधानिक ढांचे को भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय मुसलमानों के लिए भारत से बेहतर देश और हिंदू समुदाय से बेहतर दोस्त होने की बात उन्होंने पहले भी कही है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के नारे का भी उल्लेख किया। हुसैन ने अंसारी से यह सवाल भी किया कि विदेशों में राजनयिक के रूप में काम करने के अनुभव के बाद वे भारत की मौजूदा स्थिति को किस नजरिए से देखते हैं।

विवाद की शुरुआत कहां से हुई?

दरअसल, अंसारी ने नई दिल्ली में आयोजित ए.जी. नूरानी मेमोरियल लेक्चर में संविधान विशेषज्ञ और लेखक ए.जी. नूरानी की पुस्तक The RSS: A Menace to India का संदर्भ दिया था। उन्होंने पुस्तक में दर्ज जवाहरलाल नेहरू से जुड़ी एक पुरानी टिप्पणी का उल्लेख किया। अंसारी के मुताबिक, यह टिप्पणी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक से संबंधित रिकॉर्ड में दर्ज थी।

अंसारी ने इसी संदर्भ में नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बीच अंतर की चर्चा की। उन्होंने तर्क दिया कि हाल के वर्षों में राजनीतिक और सामाजिक प्रवृत्तियों को लेकर इन अवधारणाओं पर बहस बढ़ी है। उनके बयान के बाद भाजपा सहित कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई।

यह पहली बार नहीं है जब अंसारी की अल्पसंख्यकों से जुड़ी टिप्पणियों पर भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया आई हो। अगस्त 2017 में भी उनके असुरक्षा और बेचैनी संबंधी बयान के बाद शाहनवाज हुसैन ने कहा था कि मुसलमानों के लिए भारत से बेहतर देश और हिंदुओं से बेहतर दोस्त नहीं हो सकता।

Updated on:
21 Sept 2026 01:43 pm
Published on:
21 Sept 2026 12:52 pm