ईरान और US-इजरायल युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच तमाम लोगों के व्हाट्सएप पर 'वार लॉकडाउन' का नोटिस आया है। आइए जानते हैं क्या है इसकी सच्चाई?
Happy Fool Day: ईरान और US-इजरायल के बीच 28 फरवरी से शुरू हुई जंग की वजह से पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव है। ईरान-इजरायल युद्ध की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। ऐसे माहौल में लोगों को व्हाट्सएप पर 'War Lockdown Notice' आया है। इस नोटिस के ऊपरी भाग में भारत सरकार के आधिकारिक चिन्ह की मुहर लगी है। इस चिन्ह के नीचे सत्यमेव जयते लिखा हुआ है। मोबाइल पर नोटिस आने के बाद लोगों के मन में आशंका है कि क्या सच में लॉकडाउन लग सकता है?
आज के दिन यानी 1 अप्रैल को लोगों को मोबाइल पर War Lockdown Notice का मैसेज आया है। इस मैसेज के साथ भेजे गए नोटिस पर भारत सरकार की आधिकारिक मुहर लगी है। इसके अलावा पेज पर PDF का साइन बना है। इसे देखने पर यह बिल्कुल वास्तविक लगता है। हालांकि, सरकार ने ऐसा कोई नोटिस जारी नहीं किया है। यह मैसेज पूरी तरह से फर्जी है। लोगों को मूर्ख बनाने के लिए 'War Lockdown Notice' का मैसेज भेजा गया है। आज के दिन मूर्ख बनाने के लिए इस तरह के मैसेज भेजे जाते हैं। इस प्रकार के संदेश भेजने का मतलब सिर्फ मौज-मस्ती करना है।
1 अप्रैल को भारत समेत दुनियाभर में मूर्ख दिवस मनाया जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है। मूर्ख दिवस मनाने का मतलब सिर्फ मौज-मस्ती करना और लोगों को हंसाना है। आज के दिन लोग एक-दूसरे को फनी और झूठे मैसेज भेजकर मजाक करते हैं। साल 1964 में आई फिल्म का नाम भी अप्रैल फूल था। दोस्तों के साथ मस्ती करने और हंसने के लिए आप भी 1 अप्रैल को सेलिब्रेट करिए और खुश रहिए।
क्या है मूर्ख दिवस का इतिहास?
लोगों को हंसाने और मौज-मस्ती के इरादे से आज के दिन भारत समेत दुनिया के कई देशों में मूर्ख दिवस मनाया जाता है। हंसी-मजाक से भरा ये दिन बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए मजेदार होता है। अप्रैल फूल डे के इतिहास के बारे में कई कहानियां प्रचलित हैं।
इतिहासकार मनाते हैं कि अप्रैल फूल डे का इतिहास तब का है, जब 1582 में फ्रांस ने जूलियन कैलेंडर (Julian calendar) को छोड़कर ग्रेगोरियन कैलेंडर (Gregorian calendar) को अपनाया था। उस दौरान जूलियन कैलेंडर में 1 अप्रैल से नया साल शुरू होता था। वहीं, ग्रेगोरियन कैलेंडर में ये 1 जनवरी शिफ्ट हो गया। इस बदलाव को बहुत से लोग समझ नहीं पाए। ऐसे में जो लोग जूलियन कैलेंडर के हिसाब से ही 1 अप्रैल को नया साल मनाते थे। उन्हें लोग फूल यानी कि बेबकूफ बोलने लगे। उनका मजाक उड़ाने लगे। इसी वजह से उन्हें अप्रैल फूल कहा जाने लगा और इस दिन की शुरुआत हो गई।