
Harsimrat Kaur Badal: पंजाब की राजनीति में फिर से आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है। बठिंडा में शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने राज्य की पिछली पांच साल की सरकार पर गंभीर सवाल उठाए उनका कहना है कि भ्रष्टाचार, नशा और कानून-व्यवस्था की परेशानियों ने पंजाब को बुरी तरह प्रभावित किया है। उन्होंने लोगों से एकजुट होने और जागरूक बनने की भी अपील कर डाली।
असल में, आम आदमी पार्टी की सरकार पर विपक्ष लगातार हमला कर रहा है। हरसिमरत बादल ने साफ कहा कि केजरीवाल और उनके साथियों ने पंजाब का शोषण किया। सरकारी खजाना लुटा, भ्रष्टाचार बढ़ा और नशे से जुड़ी समस्याओं के साथ हत्या के मामले भी बढ़ गए। उनका कहना है कि अगर AAP फिर सत्ता में आई तो अगले पांच साल भी पंजाब ऐसी ही मुश्किलें झेलेगा।
सांसद ने लोगों से कहा कि सिर्फ सरकार बदलने की बात नहीं है, बल्कि पंजाब की आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक हालत भी मायने रखती है। वो AAP नेतृत्व को लेकर बिल्कुल नकारात्मक थीं उनका कहना था कि पार्टी के कामकाज में बदलाव की उम्मीद करना बेकार है।
2022 के विधानसभा चुनाव में AAP ने जबरदस्त जीत हासिल की थी। 117 सीटों में से 92 पर पार्टी का कब्जा हो गया था और सरकार बन गई थी। कांग्रेस को 18, अकाली दल को 3 और भाजपा को 2 सीटें मिलीं। वहीं, हाल ही में लोकसभा चुनाव में हरसिमरत कौर बादल ने बठिंडा से 3,76,558 वोटों के साथ जीत दर्ज की है।
पंजाब में नशा, बेरोजगारी, किसानों की आर्थिक हालत, कर्ज और कानून-व्यवस्था जैसे मसले हमेशा से चुनावी राजनीति का हिस्सा रहे हैं। इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में लगातार तीखी बहस चलती रहती है। हरसिमरत बादल का ये बयान फिर से इन सवालों को सुर्खियों में ले आया है।
पंजाब से सामने आए इस बयान में हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि 1984 की हिंसा उनके लिए केवल इतिहास की कोई घटना नहीं है, बल्कि ऐसी त्रासदी है जिसे उन्होंने बचपन में अपनी आंखों से देखा था। उन्होंने उस समय दिल्ली में मौजूद होने का जिक्र करते हुए बताया कि शहर में किस तरह डर और तबाही का माहौल था। उनके मुताबिक, सिख परिवारों को निशाना बनाया गया और लोगों को उनके घरों से बाहर निकालकर बर्बर तरीके से मार दिया गया।
अकाली दल की सांसद ने तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व और गांधी परिवार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उस समय सरकार की भूमिका बेहद पीड़ादायक थी। उनके बयान का सबसे अहम हिस्सा तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की उस टिप्पणी से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।