Haryana Rajya Sabha election: हरियाणा राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस (Congress) ने क्रॉस वोटिंग के डर से अपने ज्यादातर विधायकों को शिमला के रिसॉर्ट में भेज दिया है। वहां उन्हें मतदान प्रक्रिया की ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि पिछली गलतियां दोहराई न जाएं।
Haryana Rajya Sabha election: हरियाणा में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। पिछले चुनावों में क्रॉस वोटिंग और गलत मतदान के कारण झटका झेल चुकी कांग्रेस इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने अपने विधायकों को राज्य से बाहर भेजने का फैसला किया है। कांग्रेस ने अपने अधिकतर विधायकों को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के एक लक्जरी रिसॉर्ट में ठहराया है, जहां वे मतदान तक साथ रहेंगे और राज्यसभा मतदान प्रक्रिया की ट्रेनिंग भी लेंगे।
हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) ने शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित अपने आवास पर कांग्रेस विधायकों के लिए लंच आयोजित किया। इस बैठक में पार्टी के 37 में से अधिकांश विधायक शामिल हुए। लंच के बाद करीब 31 विधायक दो बसों और कुछ निजी कारों से शिमला के लिए रवाना हो गए। इस दौरान हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के हरियाणा प्रभारी बीके हरिप्रसाद भी विधायकों के साथ गए। सूत्रों के अनुसार पार्टी हाईकमान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी विधायक मतदान तक एक साथ रहें और किसी तरह की क्रॉस वोटिंग या टूट की संभावना न बने।
हालांकि पांच विधायक किसी न किसी कारण से इस यात्रा में शामिल नहीं हो सके। कुछ ने निजी कार्यक्रमों का हवाला दिया, जबकि कुछ विधायक बैठक के बाद अलग से निकल गए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शिमला में विधायकों के लिए एक तरह का ट्रेनिंग सेशन भी रखा जाएगा। पार्टी के अनुसार लगभग आधे विधायक पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं और राज्यसभा चुनाव में मतदान की प्रक्रिया काफी तकनीकी होती है। इसी के चलते शिमला में विधायकों को ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि मतदान के दौरान कोई गलती नहीं हो।
नरनौंद से विधायक जस्सी पेटवार ने कहा कि भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है, इसलिए कांग्रेस अपने विधायकों को पूरी तरह तैयार रखना चाहती है। वहीं थानेसर से विधायक अशोक अरोड़ा ने कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और कांग्रेस उम्मीदवार की जीत तय है। हालांकि शुरुआत में राव नरेंद्र सिंह ने मीडिया से कहा कि विधायक कहीं नहीं जा रहे, लेकिन कुछ ही देर बाद वे खुद बस में सवार होकर विधायकों के साथ निकलते दिखे।
कांग्रेस की यह सतर्कता पिछले राज्यसभा चुनावों में मिले झटकों से जुड़ी मानी जा रही है। 2016 के चुनाव में पार्टी उम्मीदवार आरके आनंद को क्रॉस वोटिंग और कुछ वोटों के अमान्य होने के कारण हार का सामना करना पड़ा था। इसी तरह 2022 के चुनाव में भी कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन को हार मिली थी, जब एक विधायक के वोट के अमान्य होने और कुछ क्रॉस वोटिंग के कारण भाजपा समर्थित उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा जीत गए थे। बता दें कि हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं और राज्यसभा सीट जीतने के लिए 31 वोट जरूरी होते हैं। मौजूदा गणित के अनुसार भाजपा के पास 48 और कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, जिससे दोनों पार्टियों को एक-एक सीट मिलने की संभावना है। हालांकि अतिरिक्त वोटों के कारण चुनाव में सियासी रणनीति और भी अहम हो गई है।