मुफ्ती ने कहा कि वक्फ पूरी तरह से मुसलमानों का है, फिर भी उन्होंने घोर उपेक्षा और असंवेदनशीलता दिखाई। हजरबल दरगाह एक धार्मिक स्थल है। यहां कोई भी अन्य प्रतीक चिन्ह का उपयोग करना निंदनीय है।
हजरतबल दरगाह विवाद पर अब पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा FIR दर्ज करने की कार्रवाई को चौंकाने वाला और बेतुका बताया है। इल्तिजा ने सीधे तौर पर वक्फ बोर्ड पर भी निशाना साधा और कहा कि धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाई गई है।
इल्तिजा मुफ्ती ने अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर एक पोस्ट में लिखा, "यह बेहद चौंकाने वाला और बेतुका है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर दी, जबकि वे अच्छी तरह जानते हैं कि हजरतबल दरगाह में धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाई गई।"
इल्तिजा ने अपने 'एक्स' पोस्ट में वक्फ बोर्ड की संवेदनहीनता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "वक्फ पूरी तरह से मुसलमानों का है, फिर भी उन्होंने घोर उपेक्षा और असंवेदनशीलता दिखाई। इन लोगों पर तुरंत मामला दर्ज होना चाहिए।" इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए पीपल्स कॉन्फ्रेंस पार्टी के संस्थापक सज्जाद लोन ने 'एक्स' पोस्ट के जरिए चिंता व्यक्त की।
पीपल्स कॉन्फ्रेंस पार्टी के संस्थापक सज्जाद लोन ने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए कहा कि एक पवित्र धार्मिक स्थल के भीतर किसी राजनीतिक प्रतीक का इस्तेमाल करना बेहद निंदनीय है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। अपने 'एक्स' पोस्ट में सज्जाद लोन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हजरतबल दरगाह में हुई घटनाओं का क्रम दुर्भाग्यपूर्ण है। एक पूज्य धार्मिक स्थल के अंदर किसी प्रतीक का उपयोग करना निंदनीय है।"
सीएम उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को हजरतबल दरगाह पर प्रतीक चिन्ह को अनावश्यक करार दिया है। सीएम अब्दुल्ला ने कहा कि प्रतीक चिहृन सरकारी कार्यालयों में होते हैं। मंदिरों, मस्जिदों या दरगाहों में नहीं। उन्होंने जम्मू-कश्मीर मुस्लिम वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष आसिया अंद्राबी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अंद्राबी ने पहले लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाया फिर माफी भी नहीं मांगी।
हमने पहले कभी धर्मस्थल या समारोह में राष्ट्रीय प्रतीक चिह्नों का प्रदर्शन नहीं देखा है। हजरतबल में इसे लगाने का कोई औचित्य नहीं है। सीएम अब्दुल्ला ने कहा कि इस दरगाह को शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने बनवाया, उन्होंने इसकी मुरम्मत भी कराई, लेकिन उन्होंने कभी भी व्यक्तिगत श्रेय के लिए किसी पट्टिका या पत्थर का इस्तेमाल नहीं किया, फिर भी उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है।
बता दें कि हजरतबल दरगाह में शुक्रवार को मार्बल की प्लेट पर अशोक चिह्न की उकेरी प्रतिकृति पर वहां मौजूद कुछ लोगों ने एतराज जताया और इसे इस्लाम के खिलाफ बताया। मामले ने तूल पकड़ा और वहां तनाव पैदा हो गया।