
बेंगलूरु। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने गुरुवार को कर्नाटक में कथित स्टिंग ऑपरेशन विवाद को लेकर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि कैबिनेट की बैठक से जुड़ी जानकारी मीडिया तक किसने पहुंचाई? कुमारस्वामी ने कहा कि दूसरों के टैब और उपकरणों की जांच करने के बजाय पहले मुख्यमंत्री का फोन और उनके कार्यालय के कर्मचारियों के फोन की जांच की जानी चाहिए।
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के कैबिनेट बैठक में एक फाइल ले जाने के बाद ही इस विवाद से जुड़ी जानकारी लीक हुई। उन्होंने सिद्धारमैया के शांगरी-ला होटल जाने पर भी सवाल उठाए और पूछा कि वे वहां किससे मिलने गए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस बारे में जवाब देने की मांग की।
कुमारस्वामी ने जेडीएस के आईटी विंग के एक कार्यकर्ता की गिरफ्तारी को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में सुबह-सुबह पार्टी के वॉर रूम में काम करने वाले एक युवक को हिरासत में लेकर ऐसी जगह ले गए, जो पुराने गोदाम जैसी थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि युवक को अपनी पत्नी से बात करने की अनुमति नहीं दी गई।
पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि आप दूसरों के टैब क्यों खंगाल रहे हैं। मुख्यमंत्री का फोन चेक करें, अपने उन स्टाफ सदस्यों का फोन चेक करें जो आपके लिए कॉल करते हैं। आपको सारी जानकारी मिल जाएगी।
कुमारस्वामी ने सवाल किया कि मामले में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद उसे आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड क्यों नहीं किया गया। उन्होंने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि आखिर किन आधारों पर मामला दर्ज किया गया है।
कुमारस्वामी ने कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर और कांग्रेस नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि इस पूरे विवाद की जांच किसी मौजूदा जज की निगरानी में कराई जाए। उन्होंने कहा कि वह सीबीआई जांच की मांग नहीं कर रहे, बल्कि चाहते हैं कि जांच मौजूदा जज की निगरानी में हो। उन्होंने कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे और डी.के. शिवकुमार का नाम लेते हुए कहा कि यदि सरकार को उन पर संदेह है, तो जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि वह खुद जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं।
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस का इस्तेमाल कर जेडीएस कार्यकर्ताओं को डराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं को धमकाना बंद करें।