
Bargain Land Case: रांची की स्पेशल PMLA कोर्ट ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले (ECIR 06/23) में आरोप तय कर दिए हैं। यह मामला बरगाईं सर्कल में 8.86 एकड़ जमीन घोटाले से जुड़ा है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए। उनके वकीलों, संजीव सहाय और संजय कुमार ने बताया कि स्पेशल जज द्वारा आरोप पढ़कर सुनाए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने खुद को बेगुनाह बताते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया और मुकदमे का सामना करने की बात कही। इसके बाद, कोर्ट ने अगली सुनवाई और गवाहों के बयान व सबूत पेश करने के लिए 30 नवंबर की तारीख तय की।
हेमंत सोरेन के वकील संजय कुमार के मुताबिक, सुनवाई के दौरान स्पेशल कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा लगाए गए आरोपों को एक-एक करके पढ़कर सुनाया। आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कोर्ट से कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं और वह इस मामले में बेगुनाह हैं। कानूनी प्रक्रिया के तहत, जब कोई आरोपी आरोपों को मानने से इनकार कर देता है, तो कोर्ट मामले को ट्रायल के लिए आगे बढ़ाती है।
इस मामले से जुड़े वकील संजय कुमार ने कहा, "इस मामले में अन्य सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप पहले ही तय किए जा चुके थे। सिर्फ मुख्यमंत्री का मामला लंबित था क्योंकि वह ऊपरी अदालतों में कुछ कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे थे। आज स्पेशल कोर्ट में उनके खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए। उन्होंने खुद को बेगुनाह बताया है, जिससे मुकदमे के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। ED की चार्जशीट में शामिल गवाहों और दस्तावेजों को अब गवाही के लिए कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।"
वहीं, हेमंत सोरेन के वकील संजीव सहाय ने बताया कि बचाव पक्ष ने कोर्ट में नॉट गिल्टी प्लीड किया है। उन्होंने कहा, "कोर्ट ने अब इस मामले में आगे विचार और सबूतों के लिए 30 नवंबर की तारीख तय की है। हाई कोर्ट के मामले में हमने PMLA की धारा 44(1)(d) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए एक रिट याचिका दायर की थी, हाई कोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब मांगते हुए नोटिस जारी किए हैं। यह एक गंभीर संवैधानिक मुद्दा है, और कोर्ट सभी पक्षों को सुनने के बाद ही कोई फैसला करेगा।"
कोर्ट ने इस मामले में 16 अन्य आरोपियों पर पहले ही आरोप तय कर दिए थे, लेकिन हेमंत सोरेन पर आरोप तय करने की प्रक्रिया बाकी थी। 24 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने सोरेन पर आरोप तय करने की प्रक्रिया को 30 सितंबर तक के लिए टाल दिया था, ताकि उन्हें ED द्वारा दिए गए कुछ दस्तावेजों की जांच करने का समय मिल सके। इसके बाद 30 सितंबर को आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी हो गई।
यह मामला रांची के बरगाईं इलाके में लगभग 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण से संबंधित है। ED के अनुसार, जांच में जमीन के रिकॉर्ड में हेरफेर और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप सामने आए हैं। ED यह जांच ECIR केस नंबर 06/2023 के तहत कर रही है। ED द्वारा लगाए गए आरोपों में जमीन के रिकॉर्ड में हेरफेर और अवैध रूप से संपत्ति हासिल करने में एक कथित सिंडिकेट की भूमिका को उजागर किया गया है।
विशेष अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद बरगाईं जमीन घोटाले मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ अब नियमित ट्रायल शुरू होगी। 30 नवंबर को होने वाली सुनवाई के दौरान, जांच एजेंसी (ED) अदालत के समक्ष अपने गवाह पेश करेगी और एकत्र किए गए सबूतों को साबित करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।