
High Court Judge Appointments: देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सेंट्रल गवर्मेंट ने चार हाई कोर्ट में कुल 14 नए जजों की नियुक्ति की घोषणा की है। इनमें सबसे ज्यादा नियुक्तियां दिल्ली हाईकोर्ट में हुई हैं, जहां 7 नए जजों को जगह मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट को 2 स्थायी और 5 अतिरिक्त जज मिले हैं। वहीं, झारखंड और कर्नाटक हाईकोर्ट में 3-3 स्थायी जजों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट को भी एक स्थायी जज मिला है। इन नियुक्तियों के बाद संबंधित हाईकोर्ट में जजों की संख्या बढ़ेगी, जिससे लंबित मामलों की सुनवाई और न्यायिक कामकाज को गति मिलने की उम्मीद है। केंद्र की यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब देश की अदालतों में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। नई नियुक्तियों से न्याय व्यवस्था पर काम का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
बता दें न्यायिक अधिकारी यशपाल बोर्नी को J&K और लद्दाख हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया है। जबकि न्यायिक अधिकारी संजय शर्मा, भरत पाराशर, अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज को दिल्ली हाईकोर्ट का अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया है। इसके अलावा न्यायिक अधिकारी निवेदिता अनिल शर्मा और निशा सहाय सक्सेना को दिल्ली हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया है। लिस्ट में आगे नाम न्यायिक अधिकारी उषा रानी, केएएस भरत कुमार और नेराले V भवनानी को कर्नाटक हाईकोर्ट का अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया है। न्यायिक अधिकारी मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा को झारखंड हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा अब खबर झारखंड से है। झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC और JSSC की भर्तियों को रद्द करने के सरकारी फैसले पर रोक बढ़ा दी है। मामला CDPO और JSSC-CGL परीक्षाओं से जुड़ा है। कोर्ट ने जांच की निगरानी की जिम्मेदारी रिटायर्ड जज गौतम कुमार चौधरी को दी है। इसके अलावा रिटायर्ड IPS अधिकारी आर.के. मलिक को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
कोर्ट ने कहा कि शुरुआती जानकारी में कुछ नियुक्तियों में अनियमितता के संकेत हैं। लेकिन हर नियुक्ति को गलत नहीं माना जा सकता। जिन अधिकारियों की व्यक्तिगत गलती नहीं है, उनका पक्ष भी देखा जाना चाहिए। साथ ही हाई कोर्ट ने JPSC की लंबी भर्ती प्रक्रिया पर चिंता जताई। कोर्ट के अनुसार, परीक्षा से नियुक्ति तक दो से तीन साल लग जाते हैं। ऐसे में पूरी भर्ती रद्द करने से कई उम्मीदवार प्रभावित हो सकते हैं।
वहीं राज्य सरकार ने JSSC-CGL रद्द करने के फैसले का बचाव किया। सरकार का कहना है कि इस मामले में 28 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 265 लोगों को नोटिस भी भेजे गए हैं। जांच में नेपाल, बिहार, कोलकाता और अन्य जगहों पर कथित तौर पर पेपर के जवाब उपलब्ध कराने के आरोप सामने आए हैं।