
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान। (Photo- ANI)
Punjab Election 2027: पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने है। इससे पहले सभी राजनीतिक दलों ने तैयारी तेज कर दी है। वहीं वोटरों को लुभाने के लिए पार्टियों द्वारा वादे भी किए जा रहे हैं। इसी बीच आम आदमी पार्टी भी अपने चुनावी प्रचार का शंखनाद करने वाली है। यह लुधियाना से शुरू होगा। बताया जा रहा है कि सीएम भगवंत मान कार्यक्रम में चुनावी अभियान का पर्चा भी जारी करेंगे। दरअसल, इससे पहले मान सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए 8 फीसदी बढ़ोतरी का ऐलान किया था।
बता दें कि भगवंत मान सरकार ने करीब 8 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (DA) में 8 फीसदी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। सरकार ने कर्मचारियों के साथ हर महीने अनिवार्य बैठक करने का भी फैसला किया है। मान सरकार इस फैसले को चुनावी अभियान में प्रमुखता से उठा सकती है।
दरअसल, प्रदेश में ऐसे समय में जब कर्मचारी संगठनों की ओर से लंबित मांगों और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया जा रहा था, DA में बढ़ोतरी और नियमित संवाद की घोषणा को कर्मचारी वर्ग तक पहुंच बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
AAP अब कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर विरोध और लंबित मांगों की चर्चा के बजाय सरकार के फैसलों और संवाद को अपने अभियान का हिस्सा बनाने की कोशिश करेगी।
बता दें कि आगामी विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की अब कर्मचारी वोट बैंक पर नजर है। क्योंकि प्रदेश में सरकारी कर्मचारी और पेंशनर एक बड़ा संगठित मतदाता वर्ग हैं। यही वजह है कि DA बढ़ोतरी का असर सिर्फ वेतन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसका राजनीतिक प्रभाव भी चर्चा में है।
हालांकि अभी यह कहना भी जल्दबाजी होगा कि 8 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी का फायदा चुनाव में आम आदमी पार्टी को मिलेगा। DA में बढ़ोतरी से कर्मचारियों और पेंशनरों की तत्काल आय बढ़ेगी। इससे सरकार को यह संदेश देने का अवसर मिलेगा कि उसने आंदोलन के बाद कर्मचारियों की मांग पर फैसला लिया। लेकिन दूसरी तरफ कर्मचारी संगठनों की कई मांगें अभी भी बाकी हैं।
सरकार ने खुद OPS, पेंशन के 2.59 गुणक, विभिन्न भत्तों की बहाली, ACP और प्रोबेशन अवधि के वेतन जैसे मुद्दों पर आगे बातचीत का आश्वासन दिया है।
DA बढ़ोतरी के बाद विपक्ष के सामने भी दो तरह की राजनीति की गुंजाइश है। एक तरफ वह सरकार पर कर्मचारियों को देर से राहत देने का आरोप लगा सकता है, वहीं दूसरी तरफ लंबित एरियर और अन्य मांगों को मुद्दा बनाकर कर्मचारी वर्ग के बीच अपनी जगह बनाने की कोशिश कर सकता है।
Updated on:
19 Sept 2026 12:49 pm
Published on:
19 Sept 2026 12:40 pm
