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Hindi Diwas: ‘नेताजी बंगाली भाषी थे, पर उन्होंने आजाद हिंद फौज के लिए हिंदी को अपनाया’, अमित शाह का बड़ा बयान

Hindi Diwas 2026 पर अमित शाह ने हिंदी और भारतीय भाषाओं के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से अपनी मातृभाषा न छोड़ने और अधिक भाषाएं सीखने की अपील की।
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Sep 14, 2026
Amit Shah Hindi Diwas
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह। फोटो- ANI/Britannica)

Hindi Diwas 2026: हिंदी दिवस के मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने भारतीय भाषाओं के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि हिंदी देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों को आपस में जोड़ने का काम करती है।

उन्होंने कहा कि उनकी अपनी मातृभाषा गुजराती है, लेकिन देश के किसी भी कोने में जाने पर आम लोगों से सीधे संवाद करने में हिंदी उनकी मदद करती है।

भारत की ताकत उसकी भाषाई विविधता

अमित शाह ने कहा कि भारत की ताकत उसकी भाषाई विविधता में है। हिंदी के साथ देश की सभी भारतीय भाषाओं ने आजादी के बाद राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने भारतीय भाषाओं को प्रशासन, विकास और आम जनता तक सरकारी योजनाओं व संदेशों को पहुंचाने का अहम माध्यम बताया।

'जितनी भाषाएं आप सीख सकें, सीखें'

अमित शाह ने कहा- मैं युवाओं से कहना चाहता हूं- दुनिया की जितनी भाषाएं आप सीख सकें, सीखें, लेकिन अपनी भाषा को न छोड़ें। मैं देश भर के सभी माता-पिता से भी कहना चाहता हूं कि वे अपने बच्चों से उनकी मातृभाषा में ही बात करें। अपनी भाषा बोलने से इंसान छोटा महसूस करे, ऐसी हीन भावना से बड़ा कोई पाप नहीं है। भाषा ही हमें हमारी मां, हमारी मिट्टी, हमारे इतिहास और हमारी संस्कृति से जोड़ती है।

'आजादी के बाद एक विरोधाभास पैदा हुआ'

गृह मंत्री ने आगे कहा- संविधान सभा ने 14 सितंबर, 1949 को हिंदी को भारतीय संघ की आधिकारिक भाषा के तौर पर अपनाया था। हालांकि, आजादी के बाद एक विरोधाभास पैदा हुआ। राजनीतिक आजादी तो मिल गई, लेकिन अपनी भाषा, संस्कृति और आत्म-सम्मान से जुड़े मुद्दों को हाशिए पर धकेल दिया गया।

'राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करना सिर्फ नाम बदलना नहीं था'

अमित शाह ने कहा- लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने औपनिवेशिक मानसिकता से आजादी का आह्वान किया था, और इस आजादी में भाषा की अहम भूमिका है।

उन्होंने कहा- राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करना सिर्फ नाम बदलना नहीं था; अंग्रेजों द्वारा बनाए गए दंडात्मक कानूनों की जगह तीन नागरिक-केंद्रित कानून, भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता व भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए। यह सिर्फ शब्दों का बदलाव नहीं था; यह आत्म-गौरव की पुनर्स्थापना थी।

हिंदी दूसरी भाषाओं की प्रतिद्वंद्वी नहीं

अमित शाह ने कहा- हिंदी दूसरी भाषाओं की प्रतिद्वंद्वी नहीं है। बल्कि, यह भारतीय भाषाओं के बीच सार्थक बातचीत को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाली एक अहम कड़ी का काम करती है। हमारा अपना इतिहास इस सच्चाई का सबसे अच्छा सबूत है।

उन्होंने कहा- स्वामी दयानंद सरस्वती की मातृभाषा गुजराती थी, फिर भी उन्होंने 'सत्यार्थ प्रकाश' हिंदी में लिखी। महात्मा गांधी ने 1918 में मद्रास में 'दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा' ​​की स्थापना की।

सुभाष चंद्र बोस के बारे में गृह मंत्री ने क्या कहा?

गृह मंत्री ने कहा- नेताजी सुभाष चंद्र बोस बंगाली भाषी थे, लेकिन उन्होंने आजाद हिंद फौज के लिए बातचीत की भाषा के तौर पर हिंदी को अपनाया और देश को 'जय हिंद' का नारा दिया। असल में, अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों ने हिंदी को जन-संचार की भाषा बनाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। जिन महान हस्तियों की मातृभाषा हिंदी नहीं थी, उनका योगदान हम सभी के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत है।

Updated on:
14 Sept 2026 10:19 am
Published on:
14 Sept 2026 10:07 am