ईरान-इजरायल संघर्ष की वजह से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है और क्रूड ऑयल के दामों में तेजी आई है। ग्लोबल स्तर के मौजूदा हालातों के बीच भारत सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दामों पर टैक्स में कटौती है। इस फैसले से सरकार को काफी नुकसान होगा।
Iran–Israel Conflict: ईरान-इजरायल संघर्ष की वजह से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है। इसके साथ ही ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम तेजी से बढ़े हैं। वैश्विक स्तर के मौजूदा हालातों के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में कटौती की है। पेट्रोल-डीजल पर SAED में कटौती का मतलब है कि केंद्र सरकार ने खुदरा बिक्री से होने वाले बड़े राजस्व को छोड़ दिया है, ताकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को कुछ राहत मिल सके। टैक्स कटौती के इस निर्णय से सरकार को बड़ा नुकसान होगा।
केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने तेल कंपनियों के घाटे को कम करने और घरेलू ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने के लिए यह कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की गई है। टैक्स में कटौती करने से सरकार को बड़ा नुकसान होगा। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबकि, CBIC के अध्यक्ष विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती करने से 15 दिनों में सरकार को करीब 7,000 करोड़ रुपए का राजस्व का नुकसान होगा। CBIC अध्यक्ष ने आगे कहा कि टैक्स कटौती के कदम से डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) की घरेलू उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी। सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य तेल विपणन कंपनियों की वसूली को कम करना और यह सुनिश्चित करना है कि आम आदमी के लिए ईंधन की कीमतें न बढ़ें।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने X पर लिखा- पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं। परिणामस्वरूप, दुनिया भर में उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में कीमतों में लगभग 30%-50% की वृद्धि हुई है। उत्तरी अमेरिकी देशों में 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीकी देशों में 50% की वृद्धि हुई है।
हरदीप पुरी ने आगे लिखा कि मोदी सरकार के पास दो विकल्प थे- या तो अन्य सभी देशों की तरह भारत के नागरिकों के लिए कीमतों में भारी वृद्धि करे या फिर अपने वित्त पर पड़ने वाले बोझ को वहन करें, ताकि भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से सुरक्षित रह सकें। पीएम मोदी रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से पिछले 4 वर्षों से अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को कायम रखते हुए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बार फिर अपने वित्त पर बोझ उठाने का निर्णय लिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोल और डीजल की आसमान छूती कीमतों के इस दौर में सरकार ने तेल कंपनियों के भारी नुकसान (पेट्रोल पर लगभग 24 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपए प्रति लीटर) को कम करने के लिए अपने कर राजस्व में भारी कटौती की है।